गोला के मेला मैदान में जलते रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। महान विद्वान व अपार शक्ति के धनी रावण के पुतले का दहन किया गया। इससे पहले मेला मैदान में लीला का मंचन हुआ। वृंदावन से आए कलाकारों ने श्रीराम व रावण के युद्ध का मंचन किया। विभीषण के भेद बताने पर श्रीराम ने रावण की नाभि में बाण मारकर उसका वध किया। इसके साथ ही श्रीराम के जयकारे लगे। मेला क्षेत्र में मौजूद हजारों लोगों ने रावण मर्यादा, विनम्रता और धर्म का उल्लंघन करने वाले अहंकारी रावण का दहन देखकर बुराई पर अच्छाई की जीत मनाई। इस दौरान आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रही। मेले में विधायक अमन गिरि, नगर पालिकाध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू, एसडीएम युगांतर त्रिपाठी, तहसीलदार भीमचंद, आयोजन कमेटी के अध्यक्ष धर्मेंद्र गिरि मोंटी, राकेश तिवारी, द्वारिका प्रसाद रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
श्रीराम-सुग्रीव मित्रता और बालि वध का किया मंचन
मोहम्मदी। मेले में श्रीराम-सुग्रीव की मित्रता और बाली वध लीला का मंचन किया गया। श्रीराम के पूछने पर सुग्रीव बताते हैं कि भाई किष्किंधा के राजा बाली ने अत्याचार किया है। राज-पाट, संपत्ति के साथ उनकी पत्नी पर कब्जा कर लिया है। श्रीराम के कहने पर सुग्रीव ने बाली से युद्ध किया। बाली को दंड देने के लिए श्रीराम ने पेड़ की ओट में बाली पर बाण चलाया। बाण लगने से बाली की मौत हो गई। श्रीराम ने सुग्रीव को किष्किंधा के राजा बनाया। लीला के दौरान पंडित चंद्रभाल मिश्र ने चौपाइयां पढ़ीं। दर्शकों ने लीला का आनंद लिया। संवाद