- 4231 किसानों पर एक करोड़ 39 लाख 22 हजार रुपये कर्ज
- ओटीएस के तहत किसानों का 1.51 करोड़ ब्याज होगा माफ
- मूलधन के बराबर ही लिया जाएगा ब्याज
सहकारी गन्ना समितियों से कर्ज लेने वाले किसानों पर मूलधन से अधिक ब्याज अदायगी बन गई है, जिसमें 31 मार्च 2007 से पूर्व ऋण लेने वाले किसान शामिल हैैं। जिले भर में विभिन्न समितियों के 4231 किसानों पर समितियों से लिए गए ऋण से कई गुना अधिक ब्याज अदायगी बन चुकी है, जिनके लिए राहत की खबर है। अब एकमुश्त समाधान योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में 31 मार्च 2017 तक ऐसे किसान अपना ऋण जमा कर भारी भरकम ब्याज से छूट पा सकते हैं। पात्र बकाएदारों में एक लाख से अधिक बकाया धनराशि वाले किसानों का जिला गन्ना अधिकारी, 50 हजार से एक लाख तक बकाएदारों का ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक और शेष किसानों के बकाए का संबंधित सचिव समिति एवं गन्ना विकास निरीक्षक जांच परीक्षण करेंगे।
गन्ना समितियों के सदस्य किसानों पर पुराने बकाया में मूलधन से अधिक ब्याज की रकम हो गई है। 31 मार्च 2007 से पूर्व गन्ना समितियों से 4231 किसानों ने एक करोड़ 39 लाख 22 हजार रुपये कर्ज लिया था। इन किसानों पर मूलधन से अधिक दो करोड़ 91 लाख 18 हजार रुपये ब्याज बन गया है, जिससे किसान अदायगी नहीं कर पा रहे हैं। लिहाजा गन्ना आयुक्त ने ऐसे किसानों को राहत देते हुए एकमुश्त समाधान योजना का लाभ देने के आदेश जारी किए हैं, जिसमें पात्र किसानों से मूलधन के बराबर ही ब्याज लिया जाएगा। जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि इस योजना का लाभ 31 मार्च 2017 तक किसानों को मिलेगा, जिससे किसानों का एक करोड़ 51 लाख 96 हजार रुपये ब्याज माफ हो जाएगा।
किसान को योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित गन्ना समिति की प्रबंध कमेटी से अनुमोदन कराना होगा। बकाया ऋण का मूलधन पूरा वसूल किया जाएगा और उस पर 31 मार्च 2016 तक ब्याज जोड़ा जाएगा। मूलधन के बराबर ही ब्याज वसूल किया जाएगा। शेष ब्याज की धनराशि हानि खाते में दर्शाई जाएगी।
- जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी