होली का त्योहार निकट आ रहा है तो मिलावट करने वाले भी सक्रिय हो गए हैं। होली में दुग्ध उत्पादों की मांग के कारण मावा और मिठाइयों में मिलावट का खेल शुरू हो जाता है। ऐसे में सावधान रहकर मावे की खरीदारी करने की आवश्यकता है।
होली में मावा की मांग एक सप्ताह पहले से ही होने लगती है। घरों में अभी भले ही गुझिया और मिठाइयां बननी न शुरू हुई हों, लेकिन बाजार में गुझियों की बिक्री शुरू हो गई है। इधर खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले में अभियान तो शुरू किया है पर कोई लगाम लगती नहीं दिख रही। अब भी बड़े पैमाने पर मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा मिलावट दुग्ध उत्पादों, मिठाइयाें और मावा में होती है। शहर में अधिकतर क्रीम निकाले दूध का मावा मिलता है इसके अलावा आटा, मैदा आदि भी मिला दिया जाता है। इस मिलावटी मावा से तमाम तरह की बीमारियां हो सकती हैं लेकिन थोड़ी सावधानी रखकर इससे बचा जा सकता है।
ऐसे करें मिलावट की पहचान
मावा में मिलावट की पहचान घर पर ही की जा सकती है। मावा में आयोडीन का विलयन डालने पर यदि इसका रंग नीला हो जाए तो समझना चाहिए कि इसमें मिलावट है। यदि रंग नहीं बदलता है तो इसका मतलब ठीक है।
डॉ. बीपी सिंह, समन्वयक , जिला विज्ञान क्लब, लखीमपुर खीरी
हो सकती है पेट की बीमारियां
मिलावटी खोया से पाचन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं और यदि केमिकल रंग मिलें हैं तो फूड प्वाइजनिंग भी हो सकती है इसके अलावा उल्टी,दस्त और आंत में सूजन आदि की समस्या होने का भी खतरा रहता है।
डा.अमित सिंह, ईएमओ, जिला अस्पताल