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छापे तो पड़े लेकिन जांच आगे न बढ़ी

Sat, 16 Apr 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
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चीनी ‌म‌िल - फोटो : अमर उजाला
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बजाज ग्रुप की तीन मिलों के अध्यासियों के खिलाफ मुकदमे का मामला
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दर्ज कराए गए मुकदमे की तहरीर पर उठ रहे हैं सवाल
बजाज ग्रुप की खंभारखेड़ा, गोला और पलिया चीनी मिल पर गन्ना किसानों का भुगतान न करने में दर्ज मुकदमे की जांच आगे ही नहीं बढ़ी है। 14 अप्रैल की रात में डीएम के आदेश पर संबंधित एसडीएम और सीओ के नेतृत्व में तीनों मिलों और आवासों पर छापामारी की गई। इस दौरान गोला में केन मैनेजर और पलिया में एचआर हेड को पुलिस थाने तक ले गई जहां लिखापढ़ी के बाद छोड दिया गया। किसान नेता जहां इसे प्रशासन का हाई प्रोफाइल ड्रामा बता रहे हैं वहीं पुलिस मामले में दर्ज रिपोर्ट की तहरीर पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जानबूझ कर नहीं किया नामजद
गोला गोकर्णनाथ। सहकारी गन्ना विकास समिति लि के सचिव भूपेश कुमार राय ने 10 अप्रैल की रात 11 बजे कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी विवेचना अधिकारी को उनके बयान दर्ज कर साक्ष्य लेने चाहिए थे। वादी के बयान छठवें दिन तक केस डायरी में दर्ज  नहीं हो सके हें। सचिव भूपेश कुमार राय ने बताया कि उन्हें बुलाया तो गया था लेकिन अवकाश होने के कारण वह बाहर थे। आज कोतवाली जाकर संपर्क करेंगे।
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वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण वर्मा का आरोप है कि 30 मई 2014 को समिति के सचिव भूपेश कुमार राय ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराकर चीनी मिल के डायरेक्टर ग्रुप आपरेशन एके गुप्ता और अध्यासी एनसी अग्रवाल को नामजद किया था। वर्मा ने बताया कि पूर्व समिति के तत्कालीन सचिव जगतराज ने 16 जून 2008 को बजाज ग्रुप के प्रबंध निदेशक शिशिर बजाज और उपाध्यक्ष एके गुप्ता को नामजद कर रिपोर्ट दर्ज करवाई थी किंतु दस अप्रैल को दर्ज कराये मुकदमे में बजाज ग्रुप के प्रबंध निदेशक कुशाग्र बजाज और डायरेक्टर ग्रुप आपरेशन एके गुप्ता को जानबूझकर नामजद नहीं किया गया। इस कारण पकड़े जाने के बाद भी एके गुप्ता को छोड़ना पड़ा। किसान नेता ने कहा कि वर्ष 2014 की एफआईआर में नामजद रहे अध्यासी एनसी अग्रवाल का ट्रांसफर खंभारखेड़ा चीनी मिल कर दिया गया था। अब मिल के कार्यरत अध्यासी ओमपाल सिंह का ट्रांसफर भी सुनिश्चित माना जा रहा है।
किसान नेता बोले, प्रशासन का छापा हाई वोल्टेज ड्रामा
पलियाकलां। बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे और दी जा रही दबिशों को किसान नेता शासन और प्रशासन का हाई वोल्टेज ड्रामा बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि शासन प्रशासन चाहता तो किसानों को पहले ही उनके गन्ने का भुगतान मिल गया होता। लेकिन तब शासन ने चीनी मिलों का साथ दिया। अब चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो तब शासन को किसानों की याद आ रही है। सरकार किसानों को भरमाकर अपने पक्ष में जुटाने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी के विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष मनप्रीत सिंह, सुहैल खान, परमजीत सिंह, मंगे और नैयर खान का कहना है कि प्रशासन छापे छापे के नाम पर महज खानापूरी कर रहा है और उसे संजीदगी की शक्ल दे रहा है। शासन को मुकदमा तभी दर्ज करा देना चाहिए था, जब मिल चल रही थी और किसानों को भुगतान नहीं मिल रहा था। तब स्थानीय पदाधिकारियों ने किसानों की एक न सुनी। इसके उलट किसानों को धमकाया गया और उन पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। मिल बंद होने के बाद भी किसानों ने भुगतान की मांग लेकिन प्रशासन मिलों का पैरोकार बनकर खड़ा हो गया। अब चीनी मिलों के अधिकारी भी वहां से चले गए हैं। किसान नेताओं ने सवाल उठाया कि एसडीएम और सीओ दोनों चीनी मिल में ही रहते हैं तो वह अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों करेंगे। 
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मिल के गेस्ट हाउस में रहते हैं दरोगा
गोला गोकर्णनाथ। बजाज हिंदुस्थान शुगर लि. के विरुद्घ कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसी कोतवाली के एक दरोगा काफी समय से शुगर लि के गेस्ट हाउस के कमरा नं0 चार में डेरा जमाए हुए हैं। दरोगा गेस्ट हाउस में ही नाश्ता और भोजन करते हैं और वहीं विश्राम करते हैं। पुलिस के छापे के बाद यह दरोगा चर्चा में हैं।

मिलों पर दर्ज कराए गए मुकदमे की विवेचना की जा रही है। विधि के अनुरूप कार्रवाई होगी।
- अखिलेश चौरसिया, एसपी
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