मदद की गुहार लगाते रहे मुनव्वर
जिस समय घटना हुई उस समय करीब नौ बज रहा था। ओवरब्रिज पर वाहन फर्राटा भर रहे थे। हादसे के बाद तमाम वाहन बिना रुके ही चले गए। कुछ लोगों ने मदद करते हुए दोनों को एंबुलेंस में बिठाकर जिला अस्पताल भिजवाया था। बताया गया कि मुनव्वर के सिर में चोट लगने के बाद भी वह बार-बार उठते और फिर सड़क पर लेट कर लोगों से मदद की गुहार लगाते रहे।
नौ माह की दूधमुंही बच्ची को लेकर देखे थे कई सपने
शादी के बाद जब मुनव्वर के घर में बेटी ने जन्म लिया तो वह काफी खुश थे। बेटी को देखकर मुनव्वर ने उसका नाम जन्नत रखा और उसके भविष्य को लेकर सपने संजाने शुरू दिए थे। पुत्री अभी तक बोल भी नहीं पाई थी कि इससे पहले ही उसके सिर से पिता का साया उठ गया।
पोस्टमॉर्टम हाउस पर उमड़ी भीड़, हर आंख दिखी नम
जिसने भी घटना सुनी वह सीधे मृतक के घर की ओर दौड़ पड़ा। घर पर महज महिलाओं के अलावा कोई न होने पर लोग पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे, जहां सुबह आठ बजे से लेकर करीब तीन बजे तक मुनव्वर के रिश्तेदार, दोस्त और अन्य लोग खड़े रहे। लोगों की आंखें नम थीं वहीं घटना को लेकर ही चर्चा होती रही।