जिसके बाद ही ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए बजट रिलीज किया जा सकेगा। बता दें कि ग्राम पंचायतों में चुनाव के कारण विकास कार्य पिछले चार-पांच महीने से लटके पड़े हैं। 26 दिसंबर को नई ग्राम पंचायतों के गठन के बाद गांवों में विकास के लिए बजट भेजा जाना है। चूंकि जिले में अब ग्राम पंचायतों की संख्या 995 से बढ़कर 1167 हो गई है, इसलिए विकास कार्यों में संतुलन बनाने के लिए बढ़ी 172 ग्राम पंचायतों को भी शामिल किया है। लेकिन एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी बजट जारी करने को लेकर जिला पंचायती राज माथापच्ची जारी है। सूत्रों के मुताबिक पंचायती राज विभाग ने राज्य वित्त आयोग की दूसरी किस्त के रूप में करीब 11 करोड़ रुपये जारी करने की फाइल तैयार कर स्वीकृति के लिए उपनिदेशक पंचायती राज विभाग को भेजा था, लेकिन उपनिदेशक ने बजट आवंटित करने के फार्मूले पर ऐतराज जताया है। उपनिदेशक ने फाइल को वापस कर फार्मूला चेक करने की बात कही है। बताते हैं कि उपनिदेशक को अब बजट आवंटन का फार्मूला चेक कराने के बाद दूसरी किस्त जारी की जा सकेगी। यहां गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए चार में सिर्फ 39 करोड़ रुपये की एक ही किस्त जारी की गई है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानि मार्च के आखिर तक पंचायतीराज विभाग को तीन किस्त और जारी करनी है।
आबादी के हिसाब से बना है फार्मूला
सूत्रों के मुताबिक बजट आवंटन के लिए पंचायतीराज विभाग ने एक किस्त में पंचायतों की एक हजार की आबादी पर 29 हजार रुपये का बजट का फार्मूला अपनाया है। बताया जा रहा है कि उपनिदेशक पंचायतीराज विभाग इस फार्मूले से संतुष्ट होने के बाद ही स्वीकृत देंगे। डीपीआरओ सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने बताया, ग्राम पंचायतों को बजट आवंटित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। फाइल को स्वीकृत के लिए उपनिदेशक के पास भेजा गया है। उम्मीद है तकनीकी बारीकियों के स्पष्ट होने के बाद जल्द ही इसे स्वीकृत मिल जाएगी।