मोहम्मदी रेंज की देबीपुर बीट में बाघ ने बनाया था अधेड़ को निवाला
कांबिग के दौरान एक किलोमीटर दूरी मिले बाघ के पद चिन्ह
एक सप्ताह पहले 28 अगस्त को मोहम्मदी रेंज के देवीपुर बीट में अधेड़ को निवाला बनाने वाला बाघ घटनास्थल के इर्द-गिर्द ही मौजूद है। इस बात की पुष्टि वन कर्मियों द्वारा जंगल से सटे कच्चे मार्ग और खेतों की कांबिंग के दौरान घटनास्थल से महज एक किलोमीटर के दायरे में मिले बाघ के पद चिन्हों से हुई।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज अंतर्गत देवीपुर बीट में जंगल से सटे खेत में घास काटने गए ब्लॉक बांकेगंज की पंचायत ग्रंट डाटपुर निवासी 52 वर्षीय अधेड़ नरायन को बाघ ने अपना निवाला बना लिया था। जिसका अधखाया शव और क्षतविक्षत शव इसरार खां के गन्ने के खेत में मिला था। इस घटना के बाद से वन विभाग की टीम लगातार जंगल और इससे सटे रास्तों-गन्ने खेतों की कांबिंग में जुटी है। रविवार को सुबह ग्रामीणों के साथ कांबिंग के दौरान वन विभाग की टीम में शामिल फॉरेस्टर ब्रजेश कुमार, अजीत सिंह, रामप्रसाद आदि को थाना मैलानी क्षेत्र के घमहा-लक्ष्मनपुर मार्ग पर घटनास्थल से एक किलोमीटर दायरे में कई जगह बाघ के स्पष्ट पद चिन्ह दिखलाई पड़े हैं। इससे इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि नरायन को निवाला बनाने वाला बाघ घटनास्थल के एक किलोमीटर दूरी में ही मौजूद है। यहां बता दें कि इस इलाके के 95 फीसदी एरिया में जंगल से सटे खेतों में किसानों की गन्ना फसल लहलहा रही है।
रेंजर एसएन यादव के नेतृत्व में बाघ की लोकेशन तलाशने और गन्ने के खेतों की रविवार को कांबिंग करने गई वनकर्मियों की टीम फॉरेस्टर ब्रजेश कुमार, वनरक्षक नेता रामप्रसाद, जेपी वर्मा, जयराम, बेचेलाल, सोहनलाल और सुंदरपुर, घमहाघाट, लक्षिमनपुर, अयोध्यापुर के तमाम ग्रामीणों ने टाइगर के खेतों में होने की पुष्टि की है।
चार स्थानों पर कैमरे लगाए पर नहीं कैद हुई बाघ की तस्वीर
बांकेगंज। बाघ की लोकशन ट्रेस करने के लिए वन विभाग ने चार स्थानों पर कैमरे भी लगवाए हैं, लेकिन किसी भी कैमरे में अभी तक बाघ की तस्वीर ट्रेस नहीं हुई है। बाघ लगातार वन कर्मियों को चकमा देने में कामयाब हो रहा है। हालांकि इस बीच बाघ ने किसी इंसान या पालतू मवेशी पर हमला नहीं किया है।
बाघ जंगल से सटे इलाके में गन्ने खेतों में छिपा हो सकता है। इसको देखते हुए ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि वह खेतों में अकेले न जाएं और पालतू पशुओं को भी उधर न ले जाएं। साथ ही वनकर्मियों की टीम टाइगर का रुख जंगल की ओर मोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन अभी सफलता नहीं मिली है।
एसएन यादव, रेंजर-मोहम्मदी महेंशपुर रेंज