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कांग्रेस और बसपा प्रत्याशियों के नामांकन के बाद बदलेगी बयार

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लखीमपुर खीरी। विधानसभा चुनाव 2022 की रणभेरी बज उठी है। प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया चालू है। अभी तीन दिनों में सिर्फ नौ प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है। बसपा और कांग्रेस के एक भी प्रत्याशी का नामांकन नहीं हुआ है। वहीं भाजपा के छह, सपा के एक और दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। अभी तक चुनावी बयार दो दलों के बीच बह रही है। हालांकि बसपा की धीमी चाल लोगों को हैरान कर रही है।
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जनपद में कुल आठ विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है, जिसके लिए सबसे पहले भाजपा ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए थे। इसके बाद सपा ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे, जबकि बसपा ने काफी मंथन के बाद नामांकन के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रत्याशी घोषित किए थे। कांग्रेस ने भी रविवार को प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। भाजपा ने सात विधानसभा से निवर्तमान विधायकों को पुन: प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है, तो सपा ने छह पूर्व विधायकों पर दांव लगाया है। वहीं बसपा और कांग्रेस ने ज्यादातर नए चेहरों को मौका दिया है। इनमें कइयों के पास राजनीतिक अनुभव की कमी है।
चुनाव प्रचार की बात करें तो भाजपा और सपा ही अधिसूचना जारी होने से पहले तक कर सकी थी, जबकि बसपा व कांग्रेस चुनाव प्रचार में फिसड्डी ही रहे। इसका असर यह देखने को मिल रहा है कि आम जनमानस के बीच भाजपा और सपा प्रत्याशियों के बीच ही मुख्य लड़ाई मानी जा रही है। हालांकि बसपा ने कुछ सीटों जैसे मोहम्मदी, पलिया, निघासन में ऐसे चेहरे उतारे हैं, जो जातिगत आधार पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। भाजपा व सपा में ऐसे कई चेहरे हैं, जो वोटरों पर अपनी व्यक्तिगत पकड़ रखते हैं।
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नामांकन प्रक्रिया तीन फरवरी 2022 तक चलेगी। इसके बाद प्रत्याशी चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतरेंगे। तभी वोटरों का मूड खुलकर सामने आएगा, क्योंकि अभी 31 जनवरी, 2022 तक चुनाव प्रचार के लिए रैली व जनसभा करने पर रोक लगी है। सोमवार को चुनाव आयोग चुनाव प्रचार के संबंध में गाइड लाइन जारी कर सकता है। जब जनता के बीच प्रत्याशी जाएंगे, तब वोटरों के मिजाज का खाका सामने आने लगेगा। हालांकि अभी सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के जरिए ही चुनाव प्रचार किया जा रहा है, जबकि वर्चुअल बैठकों का फंडा राजनीतिक दलों को रास नहीं आ रहा है।
राजनीतिक पंडितों की मानें तो अभी तक जो हालात हैं, उसमें मुख्य रूप से दो दलों के बीच ही चुनाव सिमटता दिख रहा है। अभी तक विधानसभा चुनाव में त्रिकोणात्मक संघर्ष की स्थिति बनाने में बसपा व कांग्रेस काफी पीछे चल रही है, जिससे वोटरों का रुझान भाजपा व सपा के बीच ही जीत-हार तय करने में लगा है।
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