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50 लाख की आबादी पर 75 सरकारी अस्पताल पर बेड 1000 से भी कम

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जनपदवासियों को कैसे मिले इलाज जब भगवान भरोसे व्यवस्था, निजी अस्पतालों की मौज
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लखीमपुर खीरी। शहर के बाद अब गांवों में बढ़ रहे संक्रमण से हालात मुश्किल हो रहे हैं। आलम यह है कि संक्रमित से लेकर सांस के मरीज तक को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है, जहां पर मरीजों को बेहतर इलाज से लेकर बेड तक के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यहां खास यह है कि 50 लाख की आबादी वाला जिला महज 75 सरकारी अस्पतालों और 950 बेड के भरोसे है।
कोरोना संक्रमण हर दिन बढ़ रहा है। गांवों में भी अब संक्रमितों की संख्या बढ़ने लगी है। उधर, सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों की भी संख्या बढ़ रही है। ऐसे में हर कोई बेहतर इलाज एवं ऑक्सीजन के लिए सीएचसी पहुंचता है। मगर स्टाफ और संसाधन की कमी से सभी को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। वहां भी मरीजों को स्टाफ और पर्याप्त संसाधन के अभाव में परेशान होना पड़ता है। जिले के हालातों पर यदि गौर करें तो रोजाना 300 से 400 संक्रमित मिल रहे हैं।
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कोविड अस्पताल में भी नहीं पर्याप्त बेड
जिले में जिस तरह से संक्रमित मिल रहे हैं उसके हिसाब से कोविड अस्पताल में भी बेड का इंतजाम नहीं है। जिला प्रशासन ने कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए जगसड़ के एक कॉलेज को कोविड अस्पताल बनाया है। जहां 250 बेड हैं। इसमें 20 बेड का आईसीयू, 10 वेंटिलेटर बेड और 230 बेड का आइसोलेशन वार्ड है। सांस के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने करीब 60 बेड पर ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था की है, जबकि जिस निजी अस्पताल को कोविड के इलाज की जिम्मेदारी थी वह खुद बेपटरी हो गया है। हालांकि, ओयल में 200 बेड के अस्पताल को कोविड अस्पताल में बदलने की तैयारी चल रही है।

न बेड न दवाएं, इमरजेंसी सेवा भी प्रभावित
गोला गोकर्णनाथ। सीएचसी में 30 बेड हैं। मगर ऑक्सीजन से लेकर दवाओं और डॉक्टरों का अभाव है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अजय कुमार वर्मा बताते हैं कि सीएचसी से 10 बेड कोविड अस्पताल बनाए गए श्री गुरु हरिकिशन डिग्री कॉलेज भेज दिए गए है। पांच ऑक्सीजन सिलिंडर हैं, जो गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशु के लिए हैं। कई चिकित्सकों की ड्यूटी कोविड अस्पताल में लगी है, जिससे एक महिला एवं दो पुरुष डॉक्टर सहित तीन फार्मासिस्ट एवं चार महिला व दो पुरुष स्टाफ नर्स है। ऐसे में इमरजेंसी सेवाओं में भी दिक्कत हो रही है।

रात में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा नहीं
पसगवां। पसगवां में सीएचसी सहित क्षेत्र के जंगबहादुरगंज, उचौलिया, बरबर, खखरा, सिसौरा नासिर, औरंगाबाद में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रात को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा नहीं है। पसगवां सीएचसी में दस बेड और ऑक्सीजन सिलिंडर हैं, मगर इलाज करने वाले कोई नहीं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अश्विनी कुमार वर्मा बताते हैं कि सभी पीएचसी सीएचसी के अधीन हैं, लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण नही है। पीएचसी प्रसव केंद्र बन कर रह गए हैं, इमरजेंसी मरीजों को देखने की व्यवस्था नहीं है।

बढ़ते संक्रमण में सीएचसी, पीएचसी पर नहीं स्वास्थ्य सुविधाएं
पलियाकलां। सीएचसी पलिया में 30 बेड और 33 लोगों का स्टाफ है, जिसमें कई लोग संक्रमित हैं, जबकि दो डॉक्टरों की ड्यूटी कोविड अस्पताल में है। ऐसे में एक डॉक्टर, फार्मासिस्ट व वार्डबॉय ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। पीएचसी मझगईं, संपूर्णानगर, विशेनपुरी, परसिया, गौरीफंटा में डॉक्टर तक नहीं हैं। सिर्फ स्टाफ मरीज देखता है।

स्टाफ न होने से भर्ती नहीं किए जा रहे मरीज
फरधान। सीएचसी में स्टाफ की कमी और संसाधनों की अनुपलब्धता के चलते सांस फूलने वाले मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। ऑक्सीजन सिलिंडर दो और एक रेगुलेटर के कारण सांस फूलने वाले मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। सीएचसी अधीक्षक अमित बाजपेयी के अलावा अन्य कोई डॉक्टर नहीं है। डॉ. अमित बाजपेयी ने बताया कि कालाआम, देवकली, लगुचा एवं खीरीटाउन में पीएचसी हैं, जहां पर एक- एक डॉक्टर हैं।

न सांस फूलने की दवा और न ही है ऑक्सीजन
ममरी। पीएचसी झाऊपुर में दो एवं परेली में चार बेड हैं। मगर, सांस फूलने की न तो दवा है और न ही ऑक्सीजन। परेली पीएचसी प्रभारी डॉ. वाईडी वर्मा ने बताया कि ऑक्सीजन के अभाव में वहां कोई भी मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे। झाऊपुर पीएचसी प्रभारी डॉ. एके शुक्ला का कहना है कि न तो सांस की दवा हैं और न ही ऑक्सीजन की व्यवस्था। कर्मचारी तक नहीं है। इसकी वजह से खांसी, जुकाम, बुखार से पीड़ित मरीजों को दवा देना भी मुश्किल है।

एक नजर
जिले की आबादी- करीब 50 लाख
कुल सरकारी अस्पताल- 75 सरकारी
कुल बेड- 950
अस्पताल- संख्या- बेड
कोविड अस्पताल- एक-250
जिला अस्पताल- एक-167
सीएचसी-15-300
पीएचसी-58-233
सीएमओ के अंतर्गत स्टाफ
पद- स्वीकृत- तैनाती- रिक्त
डॉक्टर-191-123-68
स्टाफ नर्स-45- आठ-37

आने वाले दिनों में जिले की स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर होंगी। मोतीपुर स्थित 200 बेड का महिला एवं शिशु कल्याण अस्पताल बनकर तैयार है। फिलहाल इसका उपयोग कोविड अस्पताल के रूप में किया जाएगा। साथ ही मेडिकल कॉलेज बन जाने पर जिलेवासियों को इलाज के लिए लखनऊ नहीं दौड़ना होगा।
- डॉ. मनोज अग्रवाल सीएमएओ

जिला अस्पताल का हालः 167 बेड की है मंजूरी, जुगाड़ से डाले गए हैं 230 बेड
लखीमुपर खीरी। जिला अस्पताल स्टाफ एवं संसाधन के मामले में पहले से बीमार था, लेकिन कोरोना संक्रमण के दौर ने उनकी पोल खोलकर रख दी है। जिला अस्पताल में आधिकारिक तौर पर 167 बेड हैं, जबकि किसी तरह जुगाड़कर 230 बेडों की व्यवस्था से जिला अस्पताल चल रहा है।
जिला अस्पताल में कोविड पॉजिटिव से लेकर सांस की समस्या से जूझ रहे मरीज दिन पर दिन बढ़ रहे हैं, जबकि अन्य मरीजों का भी आना जारी है। अस्पताल में स्टाफ पहले से ही कम हैं। कई डॉक्टर एवं अन्य कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव होने के कारण होम आइसोलेशन में हैं, जिससे मरीजों को उनका इलाज मिल पाने में काफी मुश्किल हो रही है। संसाधन के अभाव में आए दिन तीमारदार और स्टाफ के बीच मारपीट की खबरें आती हैं।

21 बेड के वार्ड में पड़े 40-40 बेड
जिला अस्पताल के मेडिकल महिला एवं पुरुष वार्ड में 21-21 बेड हैं। मगर मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दोनो वार्ड के बरामदे तक 40-40 बेड डलवाए गए हैं। सांस लेने में दिक्कत होने वाले मरीजों की तादाद बढ़ने से दोनों वार्ड भरे पड़े हैं।

एक स्टाफ पर 40 मरीजों की जिम्मेदारी
21 बेड के वार्ड में 40 बेड पर मरीज भर्ती हैं। पहले एक स्टाफ नर्स पर जहां 21 मरीजों की देखभाल करने की जिम्मेदारी थी। वह बढ़कर अब 40 हो गई है। स्टाफ नर्स बताती हैं कि मरीजों को दवाएं देने से लेकर लिखा पढ़ी भी करनी होती है। अकेले ड्यूटी कर इतना सब कुछ करना मुश्किल हो रहा है, जैसे-तैसे मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
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जिला अस्पताल में रिक्त पद
पद-स्वीकृत- रिक्त
अधीक्षक- एक-एक
पैथालॉजिस्ट-एक-एक
कार्डियोलॉजिस्ट-एक-एक
प्रभारी अधिकारी फार्मेसी-एक-एक
सीनियर लैब टेक्रीशियन-दो- एक
मुख्य नेत्र परीक्षण अधिकारी-एक- एक
मैट्रन- एक- एक
सहायक मैट्रेन-एक-एक
स्टाफ नर्स-23-10
चतुर्थ श्रेणी-63-15
जिला अस्पताल में स्वीकृत बेड
वार्ड स्वीकृत बेड पडे़ बेड
इमरजेंसी वार्ड आठ 11
प्राइवेट वार्ड चार -
वीआईपी वार्ड एक -
मेल सर्जिकल वार्ड 32 -
जनरल सर्जिकल वार्ड 21 -
चिल्ड्रन वार्ड 11 24
आइसोलेशन वार्ड 24
मेल मेडिकल वार्ड 21 40
फिमेल मेडिकल वार्ड 21 40
आई वार्ड 20
आईसीयू वार्ड चार 10

अस्पताल सालों पुराना है। 167 बेड स्वीकृत हैं। मगर मरीजों की संख्या को देखते हुए करीब 230 बेड डलवाए गए हैं। स्टाफ भी कम है। इसकी रिपोर्ट हर माह शासन को भेजी जाती है। पिछले करीब एक माह से मरीजों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है। इसके बावजूद मरीजों को बेहतर चिकित्सा मिल रही है।
- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
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