लखीमपुर खीरी। गांव में रहने वाली जनपद की 1265 महिलाएं अब आंगनबाड़ी सहायिका बन चुकी हैं। नियुक्तिपत्र मिलने के बाद उनके में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने कहा कि वे मेहनत से काम करेंगी और अपनी पहचान बनाएंगे।
आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में गांव की ताकत तो बनेंगी। साथ ही मातृ-शिशु स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी संभालेंगी। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका मुख्य फोकस धात्री महिलाओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर रहेगा। वह घर-घर जाकर महिलाओं को सही खानपान, टीकाकरण और बच्चों की देखभाल के बारे में जागरूक करेंगी। साथ ही कुपोषण से जूझ रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें उचित सुविधा दिलाने का प्रयास करेंगी।
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पहले केवल अपने परिवार तक ही सीमित थीं, लेकिन अब समाज के लिए कुछ करने का अवसर मिला है। यह मेरे लिए नौकरी नहीं, सेवा का मौका है।
-विमलेश कुमारी
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आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर चयन होने के बाद सोमवार को जब हाथ में नियुक्ति-पत्र आया तो काफी अच्छा लगा। घर परिवार के अलावा अब इस कार्य से उनको समाज के साथ जुड़ने का मौका मिलेगा।
आकांक्षा
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आंगनबाड़ी सहायिका बनने से एक नई जिम्मेदारी मिली है। इससे काफी कुछ सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। मेहनत से काम करके अपनी पहचान बनाएंगे।
-नमिता देवी
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सरकार ने हमें यह जिम्मेदारी दी है तो हम भी सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करेंगी। गांव के हर परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचे, यही हमारा लक्ष्य रहेगा।
पलविंद्र कौर
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आंगनबाड़ी सहायिका बनने से आने वाले समय में गांव के विकास और मातृ-शिशु कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। काफी कुछ सीखने का मौका मिलेगा।
रोली शुक्ला
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पति की मौत के बाद वह पूरी तरह टूट गई थी कि कैसे वह अपने बच्चों का पालन-पोषण करेंगी, लेकिन आंगनबाड़ी सहायिका की जिम्मेदारी मिलने उनको काफी राहत मिलेगी।
-सुषमा देवी
रोली शुक्ला
रोली शुक्ला
रोली शुक्ला
रोली शुक्ला
रोली शुक्ला