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क्षेत्र बदला, चेहरे बदले लेकिन नहीं बदली सिकंद्राबाद की तस्वीर

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मोहन राठौर - फोटो : LAKHIMPUR
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सिकंद्राबाद। वर्ष 2009 के पहले तक हैदराबाद विधानसभा क्षेत्र और उसके बाद गोला विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बनने के बावजूद सिकंद्राबाद की तस्वीर नहीं बदल सकी है। आजादी के बाद से कई विधायकों के चेहरे भी बदले, लेकिन सिकंद्राबाद की तकदीर जस की तस है। यहां न तो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सका और न ही सड़कों की दशा सुधरी। बालिकाओं की उच्च शिक्षा को एक इंटर कॉलेज तक नसीब नहीं हो सका है।
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वर्ष 1951 और 1957 के चुनावों में मोहम्मदी ईस्ट का हिस्सा रहा सिकंद्राबाद 1962 से हैदराबाद का हिस्सा बना। 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह गोला विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बन गया। इस बीच इस क्षेत्र से राम भजन शर्मा, जगदीश नरायन दत्त सिंह, राज राजेश्वर शुक्ला, माखनलाल मिश्र, राघव राम मिश्र, रामकुमार वर्मा, अरविंद गिरि और विनय तिवारी जैसे विधायक रहे। यहां से भाजपा के विधायक रहे राम कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे, लेकिन सिकंद्राबाद के हिस्से में आज तक तरक्की की रोशनी नसीब नहीं हो सकी।
मौजूदा समय में सिकंद्राबाद कस्बा गोला में है, जबकि कस्बे के बड़े चौराहे का कुछ हिस्सा कस्ता विधानसभा क्षेत्र में आता है। लखीमपुर-मोहम्मदी रोड पर स्थित सिकंद्राबाद कस्बा राजनीतिक रूप से काफी जागरूक रहा है। इसे गोला विधानसभा क्षेत्र का केंद्र माना जाता है। कस्बे से करीब दो किलोमीटर दूर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गजमोचन नाथ धाम है। किवदंती है कि मगरमच्छ के चंगुल में हाथी के फंसने पर भगवान श्रीकृष्ण ने गजराज को मुक्त कराया था। इसी से इसका नाम गजमोचननाथ पड़ा। गजमोचन नाथ को सहेजने वाले क्षेत्र को समस्याओं से निजात दिलाने वाला कोई कृष्ण अब तक नहीं मिल सका है। हर बार सिकंद्राबाद नेताओं से छला जाता रहा है।
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सिकंद्राबाद निवासी वीना त्रिवेदी का कहना है कि सिकंद्राबाद में महिलाओं के लिए बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी कोई सुविधाएं नहीं हैं। आपात स्थिति या प्रसव के लिए महिलाओं को जिला मुख्यालय या गोला भागना पड़ता है। महिलाओं के लिए शिक्षा का भी कोई प्रबंध नहीं है।
सिकंद्राबाद निवासी प्रभात त्रिवेदी का कहना है कि सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने सिकंद्राबाद को छला है। यहां न तो इंसानों के लिए पीने का शुद्ध पानी मयस्सर है और न ही सिंचाई के कोई साधन ही हैं। सिकंद्राबाद से जुड़े मजरों में सड़कों का अभाव है। आवागमन के पर्याप्त साधन तक नहीं है।
सिकंद्राबाद की बुजुर्ग महिला सुशीला देवी ने बताया कि महिलाओं के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था नहीं है। अब तक जितने विधायक या सांसद इस क्षेत्र से चुने गए किसी ने भी सिकंद्राबाद के विकास की तरफ ध्यान नहीं दिया। हम ऐसा विधायक चुनें जो क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान दें।
रोशननगर गांव निवासी आसिफ रियाज उर्फ बबलू कहते हैं कि रोशननगर गांव के पास ही गजमोचन नाथ मंदिर है जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। लखीमपुर मोहम्मदी रोड से गजमोचन नाथ मंदिर तक सड़क का निर्माण किया जाना चाहिए। क्षेत्र की सड़कों का सुधार होना चाहिए।
सिकंद्राबाद के मोहन राठौर का कहना है कि सिकंद्राबाद में गुड़ का अच्छा उत्पादन होता है, लेकिन विपणन की अच्छी व्यवस्था न होने के कारण गुड़ उत्पादकों को फायदा नहीं मिल पाता। यहां सिंचाई संसाधनों का विकास और शुद्ध पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए।
सिकंद्राबाद के युवा विपिन चौधरी कहते हैं कि सिकंद्राबाद में नेता केवल चुनाव के समय ही दिखाई देता है। चुनाव निबटने के बाद नेता हाथ हिलाते हुए रास्ते से गुजर जाते हैं। आम आदमी की समस्याओं पर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाते। जिससे यहां समस्याओं का अंबार है।

शुशीला- फोटो : LAKHIMPUR

आसिफ रियाज- फोटो : LAKHIMPUR

वीना त्रिवेदी- फोटो : LAKHIMPUR

विपिन चौधरी- फोटो : LAKHIMPUR

प्रभात त्रिवेदी- फोटो : LAKHIMPUR

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