बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते झोलाछापों का मकड़जाल पूरे जिले में फैला हुआ है। जिले में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक झोलाछाप ‘डाक्टर’ के रुप में सक्रिय हैं। यह सामान्य फिजीशियन का ही कार्य नहीं करते बल्कि आपरेशन भी करते हैं। नतीजतन कई लोग जिले में प्रति वर्ष इनके गलत इलाज से मर जाते हैं। गंभीर बात यह है कि इन मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग का नेटवर्क गांव-गांव तक है। लेकिन विभाग के पास डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की बहुत कमी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता। इसी का लाभ झोलाछाप उठाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छप्पर के नीचे, सड़कों के किनारे खोखा में कुर्सी-मेज डाले यह आराम से मिल जाएंगे।
एक अनुमान के मुताबिक जिले में लगभग 3500 झोलाछाप सक्रिय है। इसमें तमाम ऐसे भी हैं जिनके पास न कोई डिग्री है न पर्याप्त शिक्षा। कई तो सही से लिख तक नहीं पाते हैं लेकिन वे धड़ल्ले से डाक्टरी करते हैं। इनके पास मरीज भी अच्छी खासी संख्या में पहुंचते हैं। वर्ष 2011 में स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाकर 80 झोलाछापों की रिपोर्ट शासन को भेजी थी लेकिन इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
राजनीतिक दबाव भी समस्या
झोलाछापों के विरुद्ध अभियान चलाने में राजनैतिक दबाव भी बहुत बड़ी समस्या है। स्वास्थ्य विभाग के एक एसीएमओ ने बताया कि जैसे ही किसी झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है राजनैतिक लोगों का दबाव बढ़ने लगता है।
इस तरह के लगाते हैं बोर्ड
झोलाछापों में कुछ आरएमपी, कुछ आयुर्वेद, कुछ इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक एवं चंादसी और बंगाली डाक्टर बवासीर, भगंदर, नासूर और फोड़ा फुंसी आदि के गारंटी से इलाज का दावा करते बोर्ड लगाए रहते हैं। शहर के आसपास के कुछ झोलाछाप प्रशासन से बचने के लिए अपनी दुकान पर किसी एमबीबीएस डाक्टर का बोर्ड लगाकर भी इलाज करते हैं।
आपरेशन भी करते हैं झोलाछाप
ग्रामीण क्षेत्रों में कई झोलाछाप अपने घरों पर बिना किसी बोर्ड के ही डाक्टरी करते हैं। इनमें बड़ी संख्या मेें झोलाछाप अपने घरों पर ही हाइड्रोसील और फोड़ा फुंसी आदि के आपरेशन करते हैं। इतना ही नहीं इनका शहर के कई बडे़ सर्जनों से भी संबंध रहता है। बड़ा बीमारी होने पर यह शहर भेज देते हैं उसके बदले उनको कमीशन भी मिलता है।
हड्डी रोगों के इलाज का लेते हैं गारंटी
थाना और कस्बा भीरा में कई झोलाछाप ऐसे हैं जो हड्डी के किसी भी तरह के रोग का गारंटी से इलाज का दावा करते हैं। यह प्लास्टर चढ़ाने से लेकर आपरेशन तक करते हैं।
क्या होनी चाहिए कानूनी कार्रवाई
एसीएमओ डा. वीबी राम ने बताया कि झोलाछाप को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि इन्हें चिह्नित कर इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजनी चाहिए।
झोलाछापों को मिले चिकित्सामित्र का दर्जा
झोलाछाप अपने आप को अनाधिकृत नहीं मानते। झोलाछापों को चिकित्सा मित्र का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे ओमदीन ने बताया कि तमाम लोग ऐसे हैं जिनके पास अच्छे डाक्टरों के साथ कार्य करने का अनुभव है। वे कहते हैं कि सरकार को ऐसे डाक्टरों को चिकित्सामित्र का दर्जा देना चाहिए।
अफसरों के बयान मौतों को दे रहे दावत
सीएमओ डा. विजय सिंह चौहान ने बताया कि झोलाछापों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। लेकिन उनके पास स्टाफ ही नहीं हैै। ऐसे में वे कुछ नहीं कर सकते हैं।
डिप्टी सीएमओ डा. एसके रावत ने बताया कि झोलाछापों पर कार्रवाई को लेकर डा. एसके रावत बताते हैं कि इधर तीन वर्षों से कोई अभियान नहीं चलाया गया है। यदि किसी झोलाछाप के विरुद्ध शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।