सैलानियों को बाघ के दीदार कम हो पाने की वजह से दुधवा नेशनल पार्क में सैलानियों के लिए गैंडों का दीदार पहली पंसद बनता जा रहा है। बता देना लाजिमी है कि यहां बाघ के दीदार चंद सैलानियों को ही हो पाते हैं और इसी के चलते दुधवा की गैंडा परियोजना की लोकप्रियता और बढ़ती जा रही है।
बाघ खुले में घूमने वाला मनमौजी दुर्लभ वन्यजीव है और सैलानियों की भीड़ भाड़ देख ज्यादातर वह भीतरी जंगल में निकल जाता है। इससे सैलानियों को बाघ के दीदार कम ही हो पाते हैं। यह भी कहना गलत न होगा कि किस्मत वाले सैलानियों को ही उसके दीदार हो पाते हैं। ऐसा होने से सैलानियों के लिए गैंडों का दीदार पार्क भ्रमण का अहम हिस्सा बनता जा रहा है और पहली पसंद भी। इसी से तकरीबन सभी सैलानी गैंडा परियोजना का भ्रमण करते हैं। इससे परियोजना की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है।
दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर रेंज के 27 वर्ग किमी के वनक्षेत्र को ऊर्जाबाड़ से संरक्षित जंगल में गैंडा पुनर्वास परियोजना चलाई जा रही है। इसे वर्ष 1984 में शुरू किया गया था। इसमें तकरीबन 30 गैंडे हैं। सैलानियों को अलसुबह से करीब नौ बजे तक गैंडा परियोजना क्षेत्र का भ्रमण हाथियों से कराया जाता है। हाथी की सवारी के लिए छह सौ रुपये का शुल्क देना होता है और इसमें चार सैलानी सवारी करते हैं। यह सेवा सलूकापुर से सैलानियों को मुहैया कराई जाती है।
डीडी, दुधवा पीपी सिंह के अनुसार बाघ कब दिख जाय या न दिखाई दे इसका कोई
पता नहीं होता है लेकिन गैंडे का सैलानियों को दिखना तय है। गैंडा परियोजना
पहले से ही सैलानियों में लोकप्रिय है। सैलानियों के गैंडों के दर्शन को
विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि उनको कोई दिक्कत न आए। साथ ही कई मादा गैंडा
जो गर्भवती हैं उनकी बराबर निगरानी की जा रही है।
सैलानियों की दुधवा में बाढ़, पार्क प्रशासन गदगद
दुधवा के नए पर्यटन सत्र की शुरूआत हुए अभी चंद ही दिन बीते हैं और यहां सैलानियों की बाढ़ सी आई हुई है। यहां एडवांस बुकिंग चल रही है इससे पार्क प्रशासन गदगद है और कर्मियों में भी काफी खुशी है। टैक्सी वाले, गाइड भी सैलानियों की बाढ़ से उत्साहित हैं।
कई मादा गैंडा गर्भवती
दुधवा नेशनल पार्क की बगैंडा परियोजना में कई मादा गैंडों के गर्भवती होने की खबर है। जो पार्क प्रशासन के लिए खुशी की खबर मानी जा रही है। पिछले सालों में कई गैंडों की मौत से यहां गैंडा सदस्यों की संख्या में कमी आई थी।