स्कूल निगलने के बाद आबादी की ओर बढ़ रही घाघरा
स्कूल में 238 बच्चे पंजीकृत और पांच शिक्षक तैनात
रमियाबेहड़ ब्लाक क्षेत्र के लालापुर गांव का प्राथमिक स्कूल रविवार की सुबह दस बजे तक पूरी तरह नदी में समा गया। जहां स्कूल था वहां घाघरा की विनाशकारी लहरें हिलोरे भर रही हैं। लालापुर मजरा सुजानपुर में धीरे-धीरे कटान करती चली आ रही घाघरा ने आखिरकार गांव के प्राथमिक स्कूल को निगल लिया। स्कूल के शिक्षक विद्याशंकर पाल के मुताबिक स्कूल की आखिरी दीवार रविवार सुबह करीब दस बजे नदी में समा गई। इसकी सूचना बीआरसी रमियाबेहड़ को फोन पर दी है।
खंड शिक्षा अधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि स्कूल पूरी तरह नदी में समा चुका है। इस स्कूल में कुल 238 बच्चे पंजीकृत हैं और पांच शिक्षक तैनात हैं। स्कूल कटने की सूचना बीएसए को भेज दी गयी है स्कूल में पंजीकृत बच्चे पडोसी गांव माथुरपुर के स्कूल से संबंद्ध कर शिक्षकों को भी वहीं तैनात कर दिया गया है ।
----
अब तक इलाके के 13 स्कूल निगल चुकी हैं नदियां
2011 से शुरू हुए कटान का सिलसिला अब तक जारी
कटान से बचाव को नही हो रहे ठोस उपाय
धौरहरा खीरी। धौरहरा तहसील के ईसानगर, रमियाबेहड़ और धौरहरा ब्लाकों में नदियां अब तक 13 स्कूल निगल चुकी हैं। धौरहरा और ईसानगर में घाघरा और शारदा नदियों की कटान के चलते पांच प्राथमिक स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं। रमियाबेहड़ में लालापुर को मिला कर अब तक आठ स्कूल भवन शारदा और घाघरा नदियों में समा चुके है। इन स्कूलों के नाम से शिक्षकों की तैनाती भी है और बच्चों का पंजीकरण भी, बस नही बची है तो इनके अपने स्कूलों की छत।
नदियों ने न सिर्फ बस्तियों को उजाड़ा है बल्कि स्कूलों को भी लील लिया है। रमियाबेहड़ ब्लाक के लालापुर को मिलाकर शारदा और घाघरा नदियों ने अब तक 13 स्कूलों का वजूद मिटा दिया है। अब यह स्कूल सिर्फ कागजों पर हैं। यहां शिक्षक भी तैनात है और बच्चे भी पंजीकृत हैं नहीं है तो इनका अपना भवन।
तहसील क्षेत्र के धौरहरा ईसानगर के प्राथमिक स्कूल दुर्गापुर, प्राथमिक स्कूल दूल्हामऊ, प्राथमिक स्कूल जंगल नंबर तीन, रैनी, और भुर्जिनपुरवा बिना भवन के कागजों पर चलाए जा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2011 मे कटे दुर्गापुर स्कूल में वर्तमान में 120 बच्चे नामांकित है और तीन शिक्षक नियुक्त हैं। दूल्हामऊ का प्राथमिक स्कूल पूरी तरह शिक्षक और बच्चों से खाली है। 2014 में कटे जंगल नंबर तीन के प्राथमिक स्कूल में 65 बच्चे और दो शिक्षक वर्तमान में है।
इसी तरह 2015 में नदी मे समा गए रैनी गांव के प्राथमिक स्कूल में आज भी 80 बच्चे पंजीकृत और तीन शिक्षक तैनात हैं। 2016 में कटे भुर्जिनपुरवा प्राथमिक स्कूल में 160 बच्चों का नामांकन है और चार शिक्षक नियुक्त हैं। कागजों पर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दुर्गापुर का स्कूल उच्च प्राथमिक स्कूल पहड़ियापुर, जंगल नंबर तीन को प्राथमिक स्कूल समरदा, रैनी के स्कूल को इसी गांव मे टीन शेड के नीचे, और भुर्जिनपुरवा के स्कूल को समरदा के ग्राम सभा सचिवालय में स्थानांतरित किया गया है। दूल्हामऊ स्कूल पूरी तरह बंद है।
ऐसे ही ईसानगर ब्लाक के सधुवापुर, सिद्धनपुरवा और हुलासपुरवा के प्राथमिक स्कूलों को भी कटान की जद में आने पर स्थानांतरित किया गया है जो अब बिना भवन के है। रमियाबेहड़ ब्लाक में भी अनूपनगर, गंगोलिया, मोटेबाबा, लालापुर, कैलाशनगर, और माथुरपुर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को नदी निगल चुकी है। लेकिन यह स्कूल कागज पर चल रहे हैं। विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इन स्कूलों मे भी बच्चों का नामांकन है और शिक्षक भी नियुक्त है लेकिन भवन अब नही है।
जलभराव से तीन दर्जन स्कूल बने टापू, कैसे हो पढ़ाई
कीचड़ और गंदगी से बच्चों में संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका
बांकेगंज। पिछले तीन दिनों से हो रही भीषण बारिश से ब्लाक क्षेत्र के तीन दर्जन से भी अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में जल भराव हो गया है। जल भराव होने से स्कूल टापू बन गए है। इससे बच्चों और शिक्षक शिक्षिकाओं को प्रांगण में घुटनों तक भरे पानी में होकर कक्षाओं में जाना पड़ता है। जल भराव के कारण दूसरे जलीय कीड़े-मकोड़ों का खतरा पैदा होने के अलावा पानी में पसरी गंदगी से बच्चों में संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है। इसको लेकर अभिवावकों में रोष है।
बाकेगंज इलाके में तीन दिनों से हो रही बारिश से ब्लाक क्षेत्र के तीन दर्जन प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल क्रमश: लक्ष्मीपुर-खुटार, थरवरनपुर, मक्कागंज, बोझिया, इंदिरा नगर, सीतारामपुर, बरौछा, लौकिहा, शाह नगर, शिवपुर सांडा, बाकेगंज प्रथम, द्वितीय, भरिगवां आदि में जल निकास समस्या के चलते घुटनों तक जलभराव हो गया है। जलभराव में कीचड़ और गंदगी में मच्छर पैदा होकर बीमारियां परोस रहे है। बारिश के बाद धूप निकलने पर गंदे पानी में भरे कीचड़ और गंदगी से निकलने वाली दुर्गंध से बच्चों और शिक्षकों का कक्षाओं में बैठना दुश्वार हो गया है।
अभिवावकों बनवारी लाल, मनोज जायसवाल, आनंद शर्मा, गुड्डू आदि का कहना है कि स्कूल परिसर में जलभराव से बच्चों को एमडीएम गंदगी में बैठकर खाना पड़ रहा है। स्कूलों में जलभराव से परेशान अभिवावकों ने बताया कि गंदगी के बीच बैठकर एमडीएम खाने से बच्चों में संक्रामक बीमारियां फैलने का डर रहता है, इसके अलावा गंदे पानी में निकलने से बच्चों के पैरों में चर्म रोग होने से उनकी उंगलियां सड़ने लगी है। अभिवावकों ने जिम्मेदारों से स्कूलों में जलभराव समस्या के निदान की मांग की है।
उधर इस संबध में बीईओ विनोद गौतम का कहना है, स्कूलों में जल निकासी समस्या के चलते बारिश के पानी का जलभराव हो जाता है। विभाग के पास निचली जमीनों में बनें स्कूलों में मिट्टी पटाव का कोई बजट नहीं होता। संबंधित ग्राम प्रधानों से पंचायत निधि से स्कूलों में मिट्टी डलाव के लिए अनुरोध पत्र भेजा जा रहा है।