लखीमपुर खीरी। स्वायत्तशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की बेटी की इलाज के दौरान मौत हो गई। चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ ने जीपीएफ एडवांस के भुगतान में देरी को बच्ची की मौत से जोड़ा है।
संघ ने मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य को पत्र भेजकर संबंधित बाबू के खिलाफ एफआईआर, निलंबन और स्थानांतरण की मांग की है। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। जिला अस्पताल में तैनात कर्मचारी राधे की बेटी को इलाज के लिए 23 सितंबर को लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। इलाज के लिए राधे ने 24 सितंबर को जीपीएफ एडवांस के लिए संबंधित बाबू को आवेदन दिया था। कर्मचारी संघ का आरोप है कि आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद भुगतान में देरी की गई। 29 सितंबर तक रकम खाते में नहीं पहुंची। इसी दौरान बच्ची की मौत हो गई।
संघ का कहना है कि समय पर जीपीएफ की रकम मिल जाती तो बच्ची का बेहतर इलाज कराया जा सकता था। संघ के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार और जिला मंत्री राकेश कुमार ने संबंधित बाबू के खिलाफ एफआईआर, निलंबन और स्थानांतरण की मांग की है। मांगों पर गुरुवार तक कार्रवाई न होने पर शुक्रवार को जिला अस्पताल मोटीपुर में एक दिवसीय धरना देने की चेतावनी दी है। इसके बाद भी कार्रवाई न होने पर छह अक्तूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।
प्राचार्य बोलीं, अवकाश पर हूं, ज्ञापन नहीं मिला
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि बच्ची को इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया था। इसके बाद की जानकारी उन्हें नहीं है। वह इस समय अवकाश पर हैं, इसलिए उन्हें ऐसा कोई ज्ञापन नहीं मिला है।