लखीमपुर खीरी। जनपद में औद्यानिक खेती को प्रोत्साहित करनेे के लिए किसानों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शनिवार को प्रारंभ हुआ, जिसमें पहले दिन बहुफसली खेती को विकल्प के रूप में अहम बताया गया।
कृषि उत्पादन मंडी समिति राजापुर में उद्यान विभाग की राष्ट्रीय कृषि विकास (30 नान एनएचएम) की औद्यानिक विकास योजना के तहत दो दिवसीय प्रशिक्षण एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ सांसद अजय मिश्र टेनी, सीडीओ अरविंद सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सांसद ने स्टालों का अवलोकन किया। इस मौके पर टेनी ने कहा कि औद्यानिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिससे कम लागत में अधिक उपज प्राप्त करके किसान उन्नत हों। जिला उद्यान अधिकारी दिग्विजय कुमार ने केला फसल के प्रति किसानों में बढ़ते रुझान की सराहना की।
कृषि वैज्ञानिक डॉ सुहेल ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से औद्यानिक फसलों पर चर्चा की। कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रदीप कुमार बिसेन ने सब्जियों के अधिक एवं गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए पॉलीहाउस में उगाने पर कम लागत में अधिक आय की जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ निरंजन लाल ने पशुपालन, मधुमक्खी पालन और मशरूम की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया। जिला रेशम अधिकारी सीएम गौतम ने शहतूत की खेती से रेशम की पैदावार बढ़ाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में उप निदेशक कृषि डॉ योगेश प्रताप सिंह, उपनिदेशक रेशम आरएन मल्ल, केवीके अध्यक्ष एसके विश्वकर्मा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी इंद्रेशु कुमार गौतम उपस्थित रहे।
नए उद्यान के रोपण पर 50 प्रतिशत अनुदान
जिला उद्यान अधिकारी दिग्विजय सिंह ने बताया कि नवीन उद्यान रोपण पर इकाई लागत का 50 प्रतिशत, मसाला फसल कार्यक्रम में इकाई लागत का 40 प्रतिशत अनुदान की सुविधा उपलब्ध है। इसी प्रकार माइक्रोइरीगेशन में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई सुविधा के लिए निर्धारित इकाई लागत के सापेक्ष लघु सीमांत कृषकों को 90 एवं अन्य कृषकों को 80 प्रतिशत अनुदान की सुविधा दी जा रही है।