मौसम में आई तरावट से मौसम हुआ सुहावना, तापमान गिरा, फसलों को फायदा
तेज हवाओं के साथ बारिश से धान, गन्ने की फसल गिरी
जगह- जगह जलभराव बना मुसीबत का सबब
पिछले करीब एक माह से हो रही उमस भरी गर्मी के बाद बुधवार दोपहर बाद हुई मूसलाधार बारिश से मौसम में तरावट आ गई। तापमान में गिरावट आई तो मौसम सुहावना हो गया। किसानों ने भी बारिश होने से राहत की सांस ली। तेज हवाओं के साथ हुई बरसात से लखीमपुर पलिया रोड पर बड़ा पेड़ गिर जाने से आवागमन घंटो बाधित रहा। उधर, तेज हवाओं के कारण खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल भी गिर गई।
सुबह से कड़ी धूप और उमस भरी गर्मी के कारण लोग बुरी तरह बेहाल थे। दोपहर बाद आसमान में घने बादल घिर आए और करीब तीन बजे बारिश शुरू हो गई। करीब आधे घंटे हुई तेज बारिश से मौसम सुहावना हो गया। लोगों ने उमस भरी गर्मी से राहत महसूस की। यह बारिश फसलों के लिए भी फायदेमंद भी साबित हुई है। लेकिन तेज हवाओं के कारण धान, गन्ना समेत कई फसलें गिर गईं।
गोला गोकर्णनाथ। दोपहर को तेज हवा के साथ हुई झमाझम बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। क्षेत्र में तेज हवा के साथ हुई बरसात से खड़ी धान की फसल गिर गई जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें भी उभर आई हैं। नगर के निचले इलाको में जलभराव होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
बांकेगंज। कस्बे में बुधवार दोपहर आसमान में छाई काली घटा के बाद चली हवाओं संग आधे घंटे तक झमाझम बारिश हुई। एक तरफ जहां बारिश के बाद मौसम सुहावना होने से लोगो को भीषण गर्मी से राहत मिली वहीं मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर बारिश होने जलभराव हो गया। जिससे लोगों को परेशानियां उठानी पड़ी।
इसके अलावा बारिश से के साथ चली हवाओं से किसानों के खेतो में खड़ी लहलहाती धान और गन्ने की फसलें गिर गई। किसानों का कहना है कि बारिश उनके लिए फायदेमंद तो जरूर साबित हुई, लेकिन हवाओं के चलने पर खेतों में पक कर तैयार खड़ी धान और गन्ने फसल के गिरने से उसमें चूहे और अन्य बीमारियां पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।
गुलरिया। बुधवार करीब तीन बजे आई आंधी और तेज बरसात से लखीमपुर राजमार्ग पर पड़रियातुला के पास पेड गिर जाने से करीब दो घंटे तक यातायात रुका रहा। बाद में गांववालों ने पेड काटकर हटाया जिससे वाहनों का आवागमन शुरू हो सका। तेज हवा के साथ बारिश से पकी खडी धान और गन्ने की फसल गिर गई और उसमे पानी भर जाने से काफी नुकसान हो गया। जगह-जगह बने देवी जागरण के पंडाल उड़ गए और उनमे पानी भर गया।