संपूर्णानगर। बाघ को बेहोश कर पकड़ने के अभियान के लिए एक वर्ष बाद दो हथिनियां चमेली और सुलोचना वन क्षेत्र में पहुंची हैं। क्षेत्र में बाघ और तेंदुए के खौफ से किसान और मजदूर दहशत में हैं। वन्यजीव गन्ने के खेतों और रिहायशी इलाकों में ठिकाना बना रहे हैं।
बाघ के हमलों में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। इस वर्ष सात मार्च को मंझरा पश्चिम में प्रकट सिंह की जान गई थी। वहीं, बीते 28 अगस्त को शांतिनगर निवासी मुंशी प्रसाद को भी बाघ ने मार डाला था। इन घटनाओं के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। ग्रामीणों के विरोध के बाद वन विभाग को बाघ को बेहोश करने की अनुमति मिली। विभाग ने गश्त तेज की, संदिग्ध स्थानों पर पिंजरे लगाए और मानव रहित विमानों से निगरानी शुरू की।
अभियान में बाधा और आगे की योजना
हाल ही में अखंड फार्म के पास बाघ के पदचिह्न मिले थे, जिसके बाद विभाग सतर्क हो गया। बृहस्पतिवार को दो हथिनियों को वन क्षेत्र में उतारा गया था। वन क्षेत्राधिकारी ललित कुमार ने बताया कि शुक्रवार को मूसलाधार बारिश हुई। इससे बाघ के पदचिह्न धुल गए और उसका नया स्थान नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और मौसम सामान्य होते ही हथिनियों की मदद से तलाशी अभियान फिर से तेज किया जाएगा।