गोला गोकर्णनाथ। सावन के चौथे सोमवार को भूतनाथ मंदिर में आस्था और लोक संस्कृति का मेला लगा। यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। उन्होंने बाबा भूतनाथ को बेलपत्र चढ़ाकर मनौती की गांठ बांधी। प्राचीन कुएं में गिट्टी डालकर लोक परंपरा निभाई।
यह मेला आस्था का प्रतीक है, वहीं लोक संस्कृति का भी परिचायक है। यहां विलुप्त होती वस्तुओं के दर्शन होते हैं और बिक्री होती है, जिन्हें अमूमन आज की पीढ़ी भूलती जा रही है। मेले में लोगों ने रंग बिरंगी बांसुरी, तीर कमान और लाठी, पशुओं के गले में बांधे जाने वाली घंटी, पसाई के चावल, लकड़ी के सामान में खासकर खटिया, मचिया स्टूल, राखियां, हंसिया, खुरपा, खुरपी, चिलम, नारियल के खोल के हुक्के खरीदे।
वहीं कंदमूल फल, जलेबी, दानेदार बर्फी और नारियल, रवा से बनी गड़बड़झाला मिठाई का स्वाद चखा। मेले में प्राचीन विशाल पीपल के चबूतरे पर खंजड़ी हरमोनियम चिमटे की धुन पर थिरकते हुए ग्रामीण बुजुर्ग श्रद्धालुओं का ग्रामीण संगीत भजन आकर्षण का केंद्र रहा। विधायक अमन गिरि, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू ने स्वयं मेले का भ्रमण किया।
राखो मेरी लाज बंसी के बजाने वाले...
बाबा भूतनाथ मंदिर परिसर में ढपली, ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक पर लोकगीत संगीत की महफिल सजती है। जिला पीलीभीत बीसलपुर ईट गांव से आए श्रद्धालुओं ने अपने लोक संगीत से मेले में शमा बांध दी। चिमटा, ढोलक, डफली और खंजड़ी बजाकर राम अवतार, प्रकाश, रामगोपाल, ठाकुर प्रसाद, लक्ष्मण प्रसाद, ओमप्रकाश, रामगोपाल आदि बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने लोक संगीत से लोगों का मन मोह लिया। उन्होंने बताया कि वे करीब 20 वर्षों से भूतनाथ के मेले में भजन कीर्तन करते हैं।
भूतनाथ मंदिर परिसर में प्राचीन कुएं की पूजा करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : संवाद
भूतनाथ मंदिर परिसर में प्राचीन कुएं की पूजा करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : संवाद