पट्टे की जमीन को बेच दिया था भूमाफियाओं ने
गोला में दो करोड़ की जमीन पर एसडीएम का फैसला
गोला गोकर्णनाथ। बांकेगंज मार्ग पर तहसील के समीप स्थित दो करोड़ कीमत की बेशकीमती जमीन पर भूमाफिया काबिज हो गए थे। यह जमीन गोला ग्राम पंचायत की थी। भूमाफिया के नाम जमीन दर्ज कर विक्रय किए जाने के मामले में एसडीएम आलोक कुमार ने आदेश जारी कर जमीन को पुन: ग्राम पंचायत के नाम दर्जकर कब्जा दिलाने के निर्देश दिए हैं। वहीं मामले की गहनता से जांच करने का आदेश तहसीलदार को दिया है, जिससे भू माफिया में अफरातफरी है।
ग्राम पंचायत गोला बाहर की क्रम संख्या 202 रकबा एक एकड़ और 203 रकबा 0.76 एकड़ का आसामी पट्टा 14 फरवरी 1986 को सर्वजीत सिंह, गुरदीप सिंह, फौजा सिंह, मुख्त्यार सिंह, जगतार सिंह आदि के नाम किया गया था। आसामी पट्टे की अवधि सिर्फ पांच वर्ष होती है। आरोप है कि रिपोर्ट में धोखाधड़ी कर अवधि को 15 वर्ष कर दिया गया था। इस कारण धारा 143 के तहत भूमि अकृषिक घोषित कर दी गई थी। आरोप है कि पट्टेदारों ने धोखाधड़ी करने के कुछ समय बाद भूखंड को, जिस पर बाग था, प्रापर्टी डीलरों को बिक्री कर दिया था। जब बाग का कटान शुरू हुआ तो अफरातफरी मची। ग्राम प्रधान शकुंतला गोस्वामी, पर्यावरण और जन कल्याण समिति के प्रदेश सचिव अशोक कुमार मुन्ना और सरकारी वकील लालबिहारी वर्मा ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, अध्यक्ष राजस्व परिषद, जिलाधिकारी और एसडीएम से की, तो गोला पुलिस ने मौके पर जाकर कटान को रुकवा दिया था, लेकिन बाद में तत्कालीन एसडीएम आरपी सिंह के कोई कार्रवाई न करने पर पुलिस को कटे पेड़ों को छोड़ने को विवश होना पड़ा था।
श्री मुन्ना की शिकायतों पर राजस्व परिषद ने जांच के लिए जिलाधिकारी को आदेश दिया तो एसडीएम ने नायब तहसीलदार केबी सिंह को जांच सौंपी। जांच के बाद नायब तहसीलदार की आख्या पर एसडीएम न्यायालय में मुकदमा पंजीकृत किया गया और विपक्षीगण सुरजीत सिंह आदि को नोटिस जारी कर सुनवाई शुरू की गई। एसडीएम आलोक कुमार ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि चकबंदी प्रपत्र 2क बनाते समय बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के विवादित गाटा संख्या को मूल श्रेणी3 आसामी के स्थान पर संक्रमणी भूमिधर अंकित किया गया, जो सीएच प्रपत्र 11 एवं 45 में भी अंकित हुआ। उसके बाद त्रुटिवश खाता संक्रमणीय भूमिधर अंकित चला आ रहा है। बिना किसी अधिकार के सुरजीत आदि ने भूमि को अनाधिकृत रूप से विक्रय कर दिया, जो पट्टा शर्तों का खुला उल्लंघन है।
आदेश में एसडीएम ने कहा है कि विवादित भूमि श्रेणी 6 सार्वजनिक प्रयोजन की चारागाह की भूमि है। धारा 132 से प्रभावित सार्वजनिक भूमि पर किसी को भी आधार भूत अधिकार प्रदान नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए प्रशभनगत प्रविष्टि संशोधित कर विवादित भूमि ग्राम पंचायत गोला के नाम दर्ज क र ग्राम पंचायत को कब्जा दिलाने के आदेश तहसीलदार को जारी किए जाते हैं।