सास-ससुर, जेठ-जेठानी बरी
लखीमपुर खीरी। अतिरिक्त दहेज के लिए विवाहिता को प्रताड़ित करने के बाद उसे मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे प्रथम अब्दुल शाहिद ने हत्यारोपी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने साथ ही उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी योगेश पांडिया ने बताया बाराबंकी जिले के मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के बिलेहरा निवासी हनुमान प्रसाद ने पुत्री ममता का विवाह गांव ईसानगर निवासी दीपक रस्तोगी से 25 अप्रैल 2008 को किया था। आरोप है कि पति दीपक रस्तोगी और ससुरालीजन मिले दान दहेज से संतुष्ट नहीं थे, बल्कि घटिया सामान देने का आरोप लगाते हुए नवविवाहिता ममता को परेशान करने लगे। अतिरिक्त दहेज में एक लाख रुपये की मांग की गई, तब 21 जनवरी 2009 को ममता के भाई सुनील ने 20 हजार रुपये भी दे दिए, बाकी रुपये भी जल्द देने का भरोसा दिलाया। आरोप है कि पति दीपक, जेठ दीपचंद, जेठानी पिंकी, सास मुन्नी देवी और ससुर संकटा प्रसाद ने 26 जनवरी 2009 को ममता सोनी को मिट्टी का तेल डालकर जला दिया। गंभीर रूप से जख्मी ममता को पहले जिला अस्पताल लाया गया, फिर लखनऊ मेडिकल कालेज भेज दिया गया। वहां अगले दिन ही ममता की मौत हो गई। एडीजीसी योगेश पांडिया ने इस मामले में सुनील सोनी, संदीप, प्रदीप सोनी, डॉ.वीडी वर्मा, एसआई जेपी यादव, एसआई लालता बख्श सिंह तथा सीओ बसंत लाल की गवाही दर्ज कराई। इस पर कोर्ट ने हत्यारोपी पति दीपक रस्तोगी को दोषसिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही अलग-अलग दफाओं में 15 हजार रुपये का जुर्माना भी उसके ऊपर डाला है।
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नहीं चली बचाव की दलील
बचाव पक्ष पहले तो शादी की तारीख पर ही अंजान बना रहा, फिर कहा गया कि खाना बनाते समय स्टोव फटने से ममता की मौत हुई है। मृतका के पति दीपक तो बचाने की कोशिश में खुद भी जल गया था, चाहे तो जेल से डॉक्टरी भी देख लें, लेकिन जब अदालत ने बंदी दीपक का रिकार्ड जेल से मंगाया तो दाखिल होते समय रजिस्टर में दीपक के शरीर पर किसी किस्म की चोटों का उल्लेख नही मिला।
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अन्य ससुरालीजन संदेह में बरी
अदालत ने अपने फैसले में सास मुन्नीदेवी, ससुर संकटा प्रसाद, जेठ दीपचंद्र और जेठानी पिंकी की संलिप्तता के बारे में ठोस सुबूत नहीं पाया, लिहाजा उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया। हालांकि बचाव में विजय प्रकाश त्रिपाठी और रियाजुल्ला खां को पेश किया गया था।