गांव में गर्भवती महिलाओं के सेहतमंद होने के विभागीय आंकड़े जो भी हों, लेकिन ग्राउंड जीरो की तस्वीर अलग है। बस्तौली गांव को गोद लेने के बाद पहुंचे सीएचसी प्रभारी और उनकी टीम को यहां पर करीब 95 फीसदी महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित मिलीं। इनमें से चार महिलाओं की हालत तो हाई रिस्क प्रेगनेंसी के स्टेज में हैं। इन चारों महिलाओं को अस्पताल बुलाया गया है। इसके अलावा गांव में दो और बच्चे अति कुपोषित मिले।
राज्य कुपोषण मिशन के तहत बस्तौली और भानपुर गांव को सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित पाठक ने गोद लिया है। बुधवार को टीम के साथ वह गांव के आंगनबाड़ी केंद्र्र पर पहुंचे। यहां पर गर्भवती महिलाओं, किशोरियों, नवजात शिशुओं और 45 साल से ऊपर के मरीजों की सेहत की जांच के लिए विशेष कैंप लगाया। केंद्र पर पहुंचीं 32 गर्भवती महिलाओं में 30 एनीमिक निकलीं, चार महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी स्टेज में थीं। ऐसी महिलाओं में तुरंत खून चढ़ाने की आवश्यकता नजर आई, सीएचसी प्रभारी के कहने के बावजूद कुछ की ब्लड रिपोर्ट पूरी नहीं लिखी गईं। दरअसल कुछ महिलाएं तो ऐसी थीं कि उनकी पहले कभी खून की जांच हुई ही नहीं थी, ऐसी शिकायत मिलने पर प्रभारी सख्त नजर आए।
यह हुईं जांचें
28 बच्चों का टीकाकरण,18 किशोरियों की खून की जांच, 45 साल वाले 18 मरीजों की शुगर की जांच
अतिकुपोषित बच्चों की स्थिति
गांव में पांच अतिकुपोषित बच्चे पहले से थे, डॉक्टर ने जब अपने सामने वजन कराया तो दो और बच्चे अतिकुपोषित मिले। इन बच्चों को जिला पोषण सुधार केंद्र्र पर भेजने के लिए अभिभावकों को समझाया गया। डॉक्टर ने बच्चों के वजन न लिए जाने के मामले में सख्त नाराजगी जताई।
इनकी रही मौजूदगी
कैंप में एनएम सुनिधि के अलावा एलटी विजय कुमार, मनोज कुमार, काउंसलर ओमप्रकाश, एएनएम नीलम पाधा मौजूद रहीं।
रिपोर्ट पर सवाल!
सरकार को भेजे जाने वाले आंकड़े बताते हैं कि किसी-किसी गांव में एक-दो एनीमिक महिलाएं हैं, जबकि महज एक गांव में ज्यादातर महिलाएं एनमिक मिलने से पूरी रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं।