एक गांव में स्ट्रीट लाइट लगता व्यक्ति। स्रोत : विभाग
पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) की सीमा पर बसे गांवों में अब रात का अंधेरा लोगों को नहीं डराएगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने की दिशा में वन विभाग भारत केयर्स फाउंडेशन के साझा सहयोग से दुधवा जंगल की सीमा से सटे करीब 43 गांवों में नौ सौ स्ट्रीट लाइटें लगवाएगा। कुछ जगह इसका काम शुरू भी हो गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व और आबादी के बीच की दूरी कम होने के कारण अक्सर रात में हिंसक वन्यजीवों के गांवों में आने का खतरा बना रहता है। इसको देखते हुए प्रशासन ने उन रास्तों और चौराहों को चिह्नित किया है, जहां से वन्यजीवों की चहलकदमी सबसे ज्यादा रहती है। इन स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें लगने से रात्रि निगरानी भी आसान हो जाएगी। स्ट्रीट लाइट लगने के बाद टॉर्च की मध्यम रोशनी के भरोसे रहने वाले गांव वालों को अब दूधिया रोशनी में अपने घर के आसपास का नजारा साफ दिखाई देगा।
परियोजना की खास बात यह है कि इसमें सामाजिक और भौगोलिक दोनों पहलुओं का ध्यान रखा गया है। योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति थारू बाहुल्य ग्रामों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उत्तर खीरी वन प्रभाग के पलिया और मझगईं रेंज के उन गांवों में भी लाइटें लगाई जा रही हैं, जो सीधे तौर पर जंगल की जद में आते हैं। संवाद
-शाम होते ही छा जाता है सन्नाटा-
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि रोशनी होने से रात के समय गश्त करना आसान होगा और वन्यजीवों की लोकेशन ट्रैक करने में वन कर्मियों को बड़ी मदद मिलेगी। गांव वालों में भी इस पहल को लेकर काफी उत्साह है। जंगल के किनारे बसे इन गांवों में शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता था लेकिन अब रोशनी की व्यवस्था होने से लोगों के मन से असुरक्षा का भाव कम होगा। माना जा रहा है कि भारत केयर फाउंडेशन और दुधवा प्रशासन का यह प्रयास संरक्षण और जन-सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। 00000000
बढ़ते वन्यजीव-मानव संघर्ष को कम करने की दिशा में दुधवा टाइगर रिजर्व ने भारत केयर फाउंडेशन के सहयोग से यह कदम बढ़ाया है। उम्मीद है कि यह एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा।
डॉ. जगदीश आर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व