गायत्री शक्तिपीठ में प्रज्वलित अखंड ज्योति श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बनी हुई है। हजारों क्षेत्रवासी दीपावली और मांगलिक अवसरों पर यहां 23 वर्षों से प्रज्वलित देशी घी की अखंड ज्योति से दीपक जलाकर अपने घरों में स्थापित करके साधना संपन्न करते हैं। इस शक्तिपीठ के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य और सदाचार के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। बेरोजगारों को स्वरोजगार प्रशिक्षण देने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में व्यसनों, रूढ़िवादी मान्यताओं और कुप्रथाओं के विरुद्ध जन जागरण के लिए प्रज्ञा पदयात्राओं का आयोजन भी किया जाता है।
इस शक्तिपीठ ने जन सहयोग से अब तक सर्व धर्म की कुल 9722 कन्याओं का विवाह कराकर उन्हें गृहस्थी का आवश्यक सामान प्रदान किया। साथ ही अभाव और आपदा ग्रस्त को भी यथोचित सहयोग प्रदान किया है। व्यवस्थापिका डॉ. रामजानकी देवी वर्मा ने बताया कि 23 वर्षों से प्रज्वलित अखंड ज्योति में 47 क्विंटल से अधिक घी नौ कुण्डीय यज्ञशाला में 265 क्विंटल से अधिक हवन सामग्री का उपयोग हो चुका है। 19 करोड़ से अधिक गायत्री महामंत्र के अखंड जप से अनुप्राणित इस शक्तिपीठ पर सैकड़ों श्रद्धालुओं को चिकित्सा विज्ञान से असाध्य रोगों में भी चमत्कारिक लाभ मिला है।