बांकेगंज के आधा दर्जन गांवों में आज तक नहीं पहुंची बिजली की किरण
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांवों में विद्युतीकरण को लेकर काफी दावे किए थे लेकिन 70 साल बाद भी बांकेगंज इलाके के आधा दर्जन गांवों के लोग बिजली को तरस रहे हैं।
ब्लाक बांकेगंज की ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 11 के मजरा बरगदिया, भूपपुर, बंजरिया, तिलकपुर सहित पलिया ब्लाक के गिरधरपुरी में वर्ष 2012 से बिजली पोल तो खड़े हैं, लेकिन उन पर तार न खिंचने के कारण इन गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। गांव में खड़े इन बिजली पोलो पर तार खिंचने के ग्रामीण पिछले पांच साल से इंतजार कर रहे हैं। बावजूद इसके किसी का इस ओर ध्यान नहीं जा रहा है। पड़ोसी गांव में जलते बिजली बल्ब ग्रामीणों को मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे है। इससे परेशान ग्रामीणों ने विधायक रोमी साहनी से मुलाकात कर गांव के विद्युतीकरण करने की गुहार लगाई थी। विधायक का कहना है कि उन्होंने गांवों का विद्युतीकरण विधायक निधि से करवाए जाने के साथ ही इसमें आने वाले खर्च की धनराशि निधि से रिलीज करने का पत्र एक्सईन गोला को भेज दिया था। बावजूद इसके इन गांवों का अब तक विद्युतीकरण नहीं कराया गया। उधर इस बाबत एक्सईएन गोला उमेश चंद्र सोनकर का कहना है कि धनराशि रिलीज न होने के कारण संबंधित गांवों का विद्युतीकरण नहीं कराया जा सका है। धनराशि रिलीज होते ही विद्युतीकरण कराया जाएगा।
क्या कहते हैं ग्रामीण
गांव बरगदिया निवासी दिनेश कुमार का कहना है विद्युतीकरण के लिए पांच साल पहले गांव में पोल लगवाए थे। गांव में बिजली आने की खुशी में लोगो ने मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाई थीं। इतना अरसा बीतने के बाद भी बिजली नहीं आई। इसको लेकर लोग मायूस है।
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बरगदिया गांव के चेतराम का कहना है गांव का अब तक विद्युतीकरण न होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। पड़ोस के गांवों में जलते बिजली बल्ब बरगदिया के बाशिंदों को मुंह चिढ़ाते नजर आते है। बिजली न होने के कारण नाते-रिश्तेदार गांव आने से कतराते हैं।
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इसी गांव के छात्र राजू का कहना है कि आजादी के 70 बरस बीतने के बाद भी बरगदिया गांव के बाशिंदे बिजली की रोशनी को तरस रहे है। केंद्र सरकार कैशलेस और डिजिटल इंडिया की बात कहते नहीं थक रही। गांव में बिजली न होने से विद्यार्थियों को अंधेरे में पढ़ाई करनी पड़ती है।
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बरगदिया गांव की 80 वर्षीय लीलावती का कहना है कि पांच साल पहले गांव में बिजली के पोल लगाए थे। उम्मीद जगी थी कि बुढ़ापे में गांव बिजली की रोशनी से जगमग होगा। बावजूद इसके गांव में अब तक बिजली के दर्शन नहीं हुए।