लखीमपुर खीरी। जनपद के मनरेगा मजदूरों को छह माह से काम की मजदूरी न मिलने पर 50 प्रतिशत से अधिक ने काम से किनारा कर लिया है। नवंबर, 2024 से पहले रोजाना 50 हजार के आसपास मजदूर काम करते थे। बाद में संख्या 20 से 25 हजार तक सिमट कर रह गई। यह सब बजट न मिलने की वजह से हुआ। मनरेगा के कई काम भी प्रभावित हुए।
मनरेगा योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को मजदूरी पाने के लिए लंबा इंतजार और खासा परेशानी झेलनी पड़ी। मजदूरों को नवंबर 2024 के बाद से मजदूरी नहीं मिली है, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में मजदूरों ने काम से किनारा कर लिया था। मनरेगा का पैसा न आने के कारण गांव में कोई नए कार्य भी नहीं हो पा रहे है।
यह हाल पूरे जनपद का है। जनपद में वैसे तो लाखों की संख्या में जॉब कार्ड हैं, लेकिन नियमित काम करने वाले 50 से 60 हजार से अधिक मजदूर है, जिनको भुगतान नवंबर से अब तक का बकाया है।
237 रुपये प्रतिदिन की है मजदूरी
मनरेगा मजदूरों की दिहाडी 237 रुपये प्रति दिन के हिसाब है। पिछले छह माह में मनरेगा मजदूरी न मिलने पर अब तक विभाग पर लाखों रुपये का बकाया हो गया है। मजदूरी लगातार अपनी मजदूरी की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार से बजट न मिलने से मजदूरी नहीं मिल पा रही है।
कर्मचारी भी परेशान, समय पर नहीं मिलता मानदेय
उपायुक्त श्रम रोजगार विभाग में एपीओ, कंप्यूटर आपॅरेटर, एकाउंट असिस्टेंट, टेक्निकल असिस्टेंट, रोजगार सेवक सहित 883 कर्मचारी जनपद में तैनात हैं। मनरेगा मजदूरों की तहत कर्मचारी भी परेशान है। केंद्र सरकार से बजट न मिलने पर कर्मचारियों को भी समय पर वेतन नहीं मिल पाता है। हालांकि होली के बाद कुछ बजट जारी किया था, जिसमें कुछ मानदेय दिया गया है, लेकिन पूरा मानदेय अब तक नहीं मिल सका।
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केंद्र सरकार ने 10 जनवरी 2025 तक का भुगतान श्रमिकों के बैंक खातों में भेज दिया है। शत-प्रतिशत भुगतान एक हफ्ते में हो जाएगा। मजदूरों को मजदूरी मिलने पर अब संख्या भी बढ़ने लगी है।
-सुशांत सिंह, उपायुक्त मनरेगा