लखीमपुर खीरी। शहर की साफ-सफाई के लिए नगर पालिका ने जनता की गाढ़ी कमाई से कई वर्ष पहले डस्टर मशीन खरीदी थी। मशीन आने के बाद सिर्फ उसका एक बार ट्रायल किया गया। ईंधन की अधिक खपत के चलते मशीन को नगर पालिका के गोदाम में रख दिया गया, जहां अब वह खुद धूल फांक रही है।
नगर पालिका परिषद में वर्ष 2017-22 में निरूपमा मौनी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान डस्टर मशीन खरीदी गई थी। करीब 50 लाख की कीमत की इस मशीन को शहर की सड़कों पर उतारना था। ताकि इस मशीन से सड़कों की सफाई हो सके। इस मशीन को खरीदने के बाद एक बार ट्रायल किया गया। इसके बाद इसे गोदाम में बंद कर दिया गया।
नगर पालिका के सूत्रों ने बताया कि यह मशीन एक बार में काफी ईंधन लेती है। इसलिए इसे नहीं चलाया गया। वहीं लोगों का कहना है कि अगर मशीन अधिक खर्च ले रही है तो इतना मोटा बजट खर्च कर इसे खरीदना ही नहीं चाहिए था।
शहर को साफ रखने का दावा हुआ फेल
मशीन आने के बाद नगर पालिका परिषद ने शहर की सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद करने का दावा किया था। उस दौरान अधिकारियों का कहना था कि अब शहर पूरी तरह से क्लीन नजर आएगा, लेकिन दावे फेल साबित हो रहे हैं। दावों के इतने साल बाद भी शहर के सभी प्रमुख मार्ग एवं चौराहे दिन भर उड़ती धूल से अटे रहते हैं, जबकि डस्टर मशीन गोदाम में पड़ी है।
मशीन में लगे ब्रश से धूल हो जाती है साफ
डस्टर मशीन से सड़क पर जमीं धूल को पूरी तरह से साफ किया जा सकता है। मशीन-विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें स्पीड एयर सिस्टम से धूल को साफ किया जाता है। इसमें एक ब्रश भी लगा रहता है। धूल हटाने के साथ ही यह सड़कों को पूरी तरह से साफ करती चलती है। इसमें इस्तेमाल होने वाली एयर स्पीड इतनी अधिक रहती है कि सड़क पर से धूल पूरी तरह से गायब हो जाती है। इस मशीन का उपयोग करने पर सफाई कर्मियों पर सफाई कार्य का भार काफी हद तक कम हो जाता है।
तकनीकी खामियों की वजह से मशीन सड़क पर बेहतर सफाई नहीं कर पा रही है। हालांकि बीच-बीच में मशीन का प्रयोग किया जाता है। - संजय कुमार, ईओ, नगर पालिका परिषद