बांकेगंज। इस साल दीपावली का महापर्व 20 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा। इसकी तिथि पर किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है। दीपोत्सव का समय कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी से शुक्लपक्ष की द्वितीया तक पांच दिन का माना गया है।
छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ के ज्येतिषाचार्य पं. राामदेव मिश्र शास्त्री ने बताया कि कालमाधव और निर्णय सिंधु के दाेनों ग्रंथों में इस पर्व की काल सीमा स्पष्ट है। त्रयोदशी का मान अधिक होने से इस बार पंचदीपोत्सव छह दिन का होगा। कालमाधव के अनुसार, दीपावली की अमावस्या रात्रि में स्थिति होने पर ही लक्ष्मी पूजन शुभ फलदायनी होता है।
शास्त्री ने बताया कि यदि दिन में अमावस्या हो और रात्रि में शुक्ल प्रतिपदा लग जाए तो पूजन निषिद्ध होता है। 20 अक्तूबर को सूर्यास्त के बाद 02:32 मिनट अर्थात 152 मिनट का प्रदोषकाल है। सभी धर्म ग्रंथों के अनुसार पूरे देश में सौर दृक ब्राह्म गणनाओं से प्रदोषकाल व्यापिनी अमावस्या केवल 20 अक्तूबर को होने से दिवाली 20 को ही मनाई जाएगी।
वहीं, कुछ दृक पंचागों ने 21 अक्तूबर को भी दिवाली लिखी है, जिससे दृक पक्षीय पंचांगकारों और लोगों में विसंगति व्याप्त है। अर्थात जिस दिन सूर्यास्त से पूर्व अमावस्या हो और तीन मुहूर्त तक अमावस्या रहे, उस दिन दिवाली होगी। ऐसी स्थिति 20 अक्तूबर को ही बन रही है।
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दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त
- प्रदोषकाल : सोमवार सायं 05:25 से 07:49 बजे तक।
-वृष्चिक लग्न : 06:54 से 08:50 रात तक।
- सिंह लग्न : 01:22 से 03:37 बजे रात तक।
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त्योहार और दिन
-धन त्रयोदशी- 18 अक्तूबर।
-नरक चतुर्दशी- 19 अक्तूबर।
-दिवाली लक्ष्मी पूजन-20 अक्तूबर।
-गोवर्धन पूजा- 22 अक्तूबर।
-भाई दूज- 23 अक्तूबर।