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दुधवा के जंगलों से रूबरू कराया जा रहा हाथियों को

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दुधवा के जंगलों और वन्यजीवों से रूबरू हो रहे कर्नाटक के हाथी
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जंगल भ्रमण के दौरान हाथियों को रास आ रहे यहां के घास के मैदान, जलाशय
फोटो- 28एलकेएच501,502
अनिल मिश्र
बांकेगंज। कर्नाटक के बांदीपुर नेशनल पार्क से आए हाथियों को प्रशिक्षण के दौरान दुधवा नेशनल पार्क के जंगल से रूबरू कराया जा रहा है, जहां रहकार उन्हें जीवन पर्यंत काम करना है। फिलहाल उन्हें किशनपुर सेंक्चुरी बीट के कंपार्टमेंट 33,34 और 35 में ले जाकर जंगल की ऊबड़-खाबड़ गलियों, तालाब, पोखर और घास के मैदान दिखाए जा रहे हैं। जंगल के वन्यजीवों से भी उन्हें परिचित कराया जा रहा है। इन हाथियों ने कभी ट्रेन नहीं देखी है इसलिए ट्रेन की आवाज से हाथी बिदक रहे हैं।
बांदीपुर नेशनल पार्क से दुधवा आए दस हाथियों का प्रशिक्षण यहां आने के अगले दिन से ही शुरू कर दिया गया था। पहले चरण में इन हाथियों को यहां की आबोहवा में ढालने के साथ-साथ दुधवा के महावतों की भाषा और संकेतों को समझने का प्रशिक्षण दिया गया। अब ये हाथी दुधवा के महावतों की भाषा, संकेतों को अच्छी तरह समझने लगे हैं। इसके साथ ही कर्नाटक से आए महावतों ने यहां से रवाना होने से पहले धीरे-धीरे इन हाथियों से दूरी बढ़ाना भी शुरू कर दिया है। ताकि अधिकांश समय यह दुधवा पार्क के महावतों के साथ रहने की आदत डाल सकें।
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प्रशिक्षण के अगले चरण में इन्हें दुधवा के जंगल से परिचित कराने यहां के वन्यजीवों से रूबरू कराने का काम शुरू किया गया है। अब दुधवा के महावत उन्हें भ्रमण के लिए जंगल के दूरस्थ इलाकों में ले जाकर जंगल के रास्ते, तालाब,पोखरों और यहां मिलने वाले वन्यजीवों से परिचित कराने का प्रयास कर रहे हैं। इन हाथियों ने जिस तरह से यहां के महावतों से मेलजोल बढ़ाया उसी तरह यहां के वन्यजीवों से भी मेलजोल बढ़ा रहे हैं। दुधवा के महावतों इरशाद, रईश, शबीक, रामेश्वर, रामऔतार आदि ने बताया कि इस भ्रमण के दौरान कई बार यहां के बाघों से इनकी मुलाकात हुई, बाघों को देख हाथी सतर्क नजर आए। दोनों ने एक दूसरे को ऐसे देखा,जैसे वे पुराने परिचित हो।
इंसेट......
घास के मैदान और जलाशय खूब पसंद आ रहे हाथियों को ..
भ्रमण के दौरान किशनपुर सेंक्चुरी जंगल के बीच बड़े-बड़े घास के मैदान उनकी हरियाली और वहां के जलाशय इन हाथियों को खूब लुभा रहे हैं। जलाशय के पास पहुंचते ही वहां अपनी प्यास बुझाने के साथ ठंडे पानी में नहाने से अपने को रोक नहीं पाते। यहां घास के मैदानों में खड़ी लंबी-लंबी कुश और कॉस की घास हाथी बड़े चाव से खा रहे हैं। पेड़ों की कोमल टहनियां भी उन्हें काफी पसंद आ रहीं हैं।
इंसेट..
अभी ट्रेन की आवाज से डर रहे हाथी..
कर्नाटक से आए हाथी ट्रेन की आवाज से डरते हैं। कर्नाटक के महावतों बाबू, रिजवान, मोहम्मद हिच, मंजूनाथ एस, अन्नपा,महादेवा, जेके गणेश आदि का कहना है कि इन हाथियों ने अभी ट्रेन नहीं देखी थी। इसलिए ट्रेन की सीटी और चलने की आवाज सुनकर ये हाथी डर जाते हैं। कभी-कभी बिदक जाने पर इन्हें संभालना मुश्किल पड़ जाता है। ऐसा ही पिछले दिनों जंगल भ्रमण के दौरान देखने में आया। बेस कैंप के पास जंगल भ्रमण के लिए किशनपुर सेंक्चुरी जाते समय ट्रेन की आवाज सुनकर ये हाथी बिदक गए, उन्हें प्रशिक्षित महावतों ने काबू में किया। आमतौर पर किशनपुर सेंक्चुरी जाते समय इन हाथियों को रेल पटरी पार करनी पड़ती है। समय बीतने के साथ ट्रेन आवाज की पहचान के बाद दिक्कत दूर हो जाएगी।
दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी के वन्यजीव प्रतिपालक डीके चतुर्वेदी,बेस कैंप इंचार्ज मैलानी रेंजर नसीम अहमद ने बताया कि हाथियों की देखभाल,भोजन,पानी के अलावा जंगल भ्रमण, ट्रेनिंग, सुरक्षा और सेहत पर विशेष नजर रखी जा रही है। कर्नाटक से आए हाथी 25 दिन के अंदर ही यहां के माहौल में पूरी तरह ढल गए हैं।
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वर्जन-
कर्नाटक से आए हाथियों की बेस कैंप में ट्रेनिंग के साथ ही उन्हें समय से भोजन,पानी उपलब्ध कराने के अलावा जंगल भ्रमण और ट्रेनिंग दी जा रही है। चार महीने यहां प्रवास के बाद ये हाथी दुधवा नेशनल पार्क आएंगे। आबोहवा बदलने के बावजूद हाथियों की सेहत दुरुस्त है।
- महावीर कौजलगि,उप-निदेशक, दुधवा नेशनल पार्क।
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