सचिवों के आंदोलन से थम सकता है गांवों का विकास
ओडीएफ के अभियान को लगेगा पलीता, अन्य निर्माण कार्य होंगे प्रभावित
आज से 250 कर्मचारी तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों (सचिवों) ने संवर्गीय मांगों को लेकर आंदोलन छेड़ रखा है। अब सभी कर्मचारी 28 मई से तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर संपूर्ण कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे, जिसके बाद पांच जून से समस्त कर्मचारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले जाएंगे। इससे गांवों में विकास कार्य ठप हो जाएंगे और प्रधानमंत्री की प्राथमिकता वाले ओडीएफ जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को झटका लग सकता है।
जनपद में कुल 1172 ग्राम पंचायतें है, जिनमें विकास कार्य कराने समेत कई योजनाओं के संचालन में ग्राम विकास अधिकारियों/ ग्राम पंचायत अधिकारियों की विशेष भूमिका है। तीन सूत्री मांगों के लिए सचिवों का आंदोलन 26 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। 16 मई से 25 मई तक काली पट्टी बांधकर शासकीय कार्य करने के बाद अब आंदोलन अगले चरण में प्रवेश करेगा, जिसमें 28 मई से समस्त कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर कार्य बहिष्कार करेंगे। इसके बाद दो जून 2018 को सभी कर्मचारी विकास भवन गेट पर सामूहिक उपवास करेंगे। पांच जून 2018 को प्रांतीय समन्वय समिति के अध्यक्ष आमरण अनशन शुरू करेंगे, जिसके साथ ही सभी कर्मचारी सामूहिक रूप से कलमबंद हड़ताल पर चलें जाएंगे और यह कार्य बहिष्कार अनवरत चलेगा, जब तक सरकार मांगों पर विचार नहीं करती।
इससे पहले विधायकों और सांसदों से अपनी मांगों के समर्थन में पत्र लिखवाकर संगठन ने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगों से अवगत करा चुके हैं। इन कर्मचारियों की मांगों पर अभी तक सरकार ने संज्ञान नहीं लिया है। मौजूदा समय में सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं में समयबद्ध तरीके से कार्य कराया जाना है, जिसमें 3.20 लाख शौचालयों का निर्माण कराया जाना प्रमुख है। दो अक्तूबर तक जिले को ओडीएफ किया जाना है। ओडीएफ के लिए प्रतिदिन शौचालय निर्माण की मानीटरिंग की जा रही है, लेकिन सचिवों का आंदोलन सरकार की मंशा पर पानी फेर सकता है।
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ये तीन सूत्री मांगें
1.ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी की शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट के स्थान पर स्नातक, पद की अधिमानी अर्हता सीसीसी के स्थान पर ओ लेवल कंप्यूटर किया जाए।
2.वेतनमान सातवें वेतन आयोग की पे मैट्रिक्स के अनुसार प्रारंभिक मूल वेतन 29200 रुपये किया जाए।
3.सीधी भर्ती के सापेक्ष कम से कम 30 प्रतिशत पद सृजित कर समय से 10 वर्ष पर प्रथम प्रोन्नति, 16 वर्ष पर द्वितीय और 26 वर्ष पर तृतीय प्रोन्नति दी जाए। प्रोन्नति न दे पाने की स्थिति में प्रोन्नति पद का वेतनमान एसीपी प्रदान किया जाए।
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इनकी मांगें सरकार स्तर की है, जिससे हम अपने स्तर से कुछ कर भी नहीं सकते हैं। आंदोलन से गांवों को ओडीएफ करने का कार्यक्रम प्रभावित जरूर होगा। इसके अलावा अन्य विकास कार्य बाधित हो जाएंगे।
चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ