लखीमपुर खीरी। बाघों के घर में इंसानी घुसपैठ और दखलंदाजी के चलते बाघ इंसानी आबादी में दस्तक दे रहे हैं। जंगल से सटी भूमि पर हो रही खेती से बाघों के प्राकृतिक आवास में खलल बढ़ रहा है। गन्ने की खेती बाघों के आबादी के पास तक आने में सहायक भी साबित हो रही है। जंगल में जलौनी लकड़ी, झोपड़ी बनाने के लिए फूस और बल्लियों आदि के अलावा बरसात में कटरुआ, धरती के फूल आदि के लिए लोगों की जंगल में आवाजाही रहती है। अब बाघ अपनी मांद में भी सुरक्षित नहीं है। इससे बाघों के हमलों में बढ़ोत्तरी हो रही है।
तराई क्षेत्र में गन्ने की खेती में इजाफा होने से बाघों के जंगल से बाहर निकलने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। बाघों के खेतों में आने की घटनाएं अक्सर सर्दियों में बढ़ती थीं लेकिन पिछले दो तीन वर्षों में बाघ हर मौसम में जंगल से बाहर निकलकर इंसानों पर हमलावर हो रहे हैं। पिछले साल जुलाई और अगस्त माह में मैलानी रेंज के ही सुआबोझ, खरेहटा, भरिगवां, छेदीपुर गांवों में बाघों ने एक किशोरी समेत आठ लोगों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। बाद में उसे ट्रैंकुलाइज कर लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया, जहां वह छेदी सिंह के नाम से अपने गुनाहों की सजा काट रहा है।
इंसेट......
सिकुड़ रहे जंगल, बढ़ रही बाघों की आबादी
राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य, वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि जंगलों में बढ़ती इंसानी दखलंदाजी से बाघों की प्रकृति में बदलाव आ रहा है। बाघों की आबादी बढ़ रही है अतिक्रमण के कारण जंगल सिकुड़ते जा रहे हैं। इसके चलते बाघ जंगल से निकलकर खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।
वर्जन......
डीएफओ साउथ अखिलेश पांडेय का मानना है कि खीरी के जंगलों में अनुकूल वातावरण, पर्याप्त भोजन, पानी और सुरक्षा मिलने से बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। वन विभाग की सतर्कता और जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद जंगलों में इंसानी घुसपैठ नहीं रुक रही है। इससे बाघ जंगल से बाहर आ रहे हैं। वन विभाग बाघों की बराबर मानीटरिंग कर रहा है।
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