लखीमपुर खीरी।
शहर की सड़कों पर आवारा घूमते जानवर लोगों के लिए बवाले जान बन चुके हैं। यह छुट्टा जानवर शहर के यातायात को तो प्रभावित करते ही है, अचानक किसी पर भी हमला कर उसे घायल भी कर देते हैं। सब्जी, फल और अनाज मंडी में तो इन आवारा जानवरों के कारण निकलना और खरीदारी करना खतरे से खाली नहीं है। नगर पालिका ने इन छुट्टा जानवरों पर अंकुश लगाने के लिए कैटल कैचर मंगाए, कई पशु बाड़े बनवाए लेकिन उनका इस्तेमाल कभी नहीं हुआ। कैटल कैचर पालिका परिसर में जंग खा रहे हैं और पशुबाड़े सुनसान पड़े हुए हैं।
शहर के पशुपालक गायों का दूध निकालने के बाद शहर में खुला छोड़ देते हैं। बूढ़ी और निष्प्रयोज्य हुई गायों को भी इसी तरह खुली छोड़ दिया जाता है। यह जानवर सब्जी, फल और अनाज की दुकानों पर मुंह मारते रहते हैं। दुकानदारों केे भगाने पर यह जानवर उधर से गुजर रहे लोगों पर हमला कर घायल कर देते हैं। शहर की मेन रोड, अस्ताल रोड, संकटादेवी रोड और बस स्टेशन जैसी व्यस्ततम सड़कें भी इन जानवरों के आतंक से अछूती नहीं हैं। लखीमपुर शहर में आवारा जानवरों से प्रति माह घायल होने वालों का आंकड़ा छह से 10 व्यक्ति का है।
--
कंपनी बाग तिराहे पर सड़कों पर बैठे रहते जानवर
कचहरी रोड पर कंपनी बाग तिराहे पर पूरे दिन आवारा जानवरों का जमावड़ा रहता है। अक्सर यह जानवर बाइक सवार और पैदल चलने वाले लोगों को ठोकर मार कर घायल कर देते हैं। पिछले माह एक ही दिन में इसी जगह पर जानवरों के हमले से तीन लोग घायल हुए थे।
--
कब बिगड़ जाए सांड़ का मिजाज भरोसा नहीं
नौरंगाबाद की व्यस्त सड़क पर दो तीन सांड़ हमेशा मौजूद रहते हैं। कभी आपस में लड़ना शुरू कर देते हैं तो दोनों ओर से आवागमन रुक जाता है। यदि इस बीच धोखे से भी कोई इनकी चपेट में आया तो हाथ पैर टूटने से नहीं बच सकते। खतरे की राह निकलना यहां मजबूरी है।
--
राजापुर रोड पर होता है जानवरों का द्वंद्व
खीरी-राजापुर रोड पर साड़ों का द्वंद्व अक्सर देखा जा सकता है। यह रोड शहर की व्यस्ततम सड़कों में से एक है। सड़क के बीचोबीच बैठे सांड़ कब लडना शुरू कर दें कहा नहीं जा सकता। स्कूल आने जाने वाले बच्चे अक्सर इन जानवरों की चपेट में आकर घायल होते रहते हैं।
--
विकास भवन के पास गंदगी में भोजन तलाशते जानवर
विकास भवन के निकट नगर पालिका के कूड़ा घर की गंदगी में हर समय गायों और साड़ों को मुंह मारते देखा जा सकता है। कूड़े में पड़ी पॉलिथीन तक यह जानवर खा जाते है। इनके दौडने भागने पर अक्सर लोग इसकी चपेट में आकर अब तक कई लोग चोट खा चुके हैं।
--
पशु पालकों से बार-बार अपील की जाती है कि वे अपने जानवर सड़कों पर छुट्टा न छोड़ें। आवारा पशुओं को पकड़कर पशुबाड़े में पहुंचाने का काम कठिन है। स्टाफ की भी कमी है, इसके बावजूद जल्दी ही आवारा जानवरों को पकड़कर पशुबाड़ों में पहुंचाया जाएगा।
-अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका लखीमपुर