तहसील क्षेत्र के रामनगर बगहा गांव में भूमाफिया ने तत्कालीन लेखपाल से मिल कर पुरानी खतौनी में हेराफेरी कराकर यहां के तालाब, चकमार्ग, मरघट, खलिहान, बंजर, परती भूमि अपने नाम दर्ज करा ली। कुछ ने तो फर्जी खतौनी के सहारे दूसरों को भूमि का बैनामा भी कर दिया। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल सहित डीएम और एसडीएम से पत्र देकर शिकायती की तो एसडीएम ने जांच के आदेश कर दिए। इससे भूमाफिया खेमे में हड़कंप मच गया है।
तहसील क्षेत्र में भूमाफिया काफी सक्रिय हैं। वन विभाग की सैकड़ों एकड़ भूमि पर तो इन भूमाफिया का कब्जा है ही साथ ही राजस्व भूमि पर भी कुछ लेखपालों से साठगांठ कर भूलेखों मे हेराफेरी कर खुद ही जमीन के मालिक बन बैठे हैं। कुछ ने तो परती भूमि को अपने नाम दर्ज करा दूसरों के नाम बैनामा भी कर दिया। ऐसा ही एक मामला रामनगर बगहा गांव का प्रकाश में आया है। यहां के ग्रामीण छंगा ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल सहित डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह और एसडीएम आशीष कुमार को प्रार्थनापत्र देकर जांच की मांग की है।
मालूम हो रामनवगर बगहा की सन फसली 1388 से 1393 में गाटा संख्या 1792, नवीनपरती, 1719 और 1913 नवीन परती, 1804 और 1926 बंजर नवीन परती, 1225 चकमार्ग, 702 तालाब और 1583 सीलिंग भूमि अंकित है। इन गाटों का कुल रकबा 1500 एकड़ है। वर्तमान खतौनी में इस राजस्व भूमि की गाटा संख्या पर भूमाफिया के नाम अंकित हो चुके हैं। इस भूमि पर इन भू माफिया का अवैध कब्जा है। इसमें कुछ ऐसे भी मामले है जिन्होंने पूरी होशियारी से राजस्व अभिलेखों में अपने नाम अंकित कराकर दूसरों के नाम बैनामा भी कर दिया, जो दाखिल खारिज के समय तहसीलदार न्यायालय में प्रस्तुत होने पर लेखपाल की रिपोर्ट से खुलासा हुआ। नतीजतन दाखिल खारिज रोक दी गई।
ग्रामीण छंगा ने इस मामले को 18 सितंबर को जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह और एसडीएम आशीष कुमार मिश्रा को प्रार्थना पत्र देकर भूमाफिया के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। मामले को गंभीरता से लेकर एसडीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। इससे सरकारी भूमि पर काबिज भूमाफिया में हड़कंप मच गया है।
एसडीएम ने बताया मामला बहुत ही गंभीर है। शिकायत पर जांच की जा रही है। यदि हेरीफेरी सिद्ध हुई तो कोई भी कितना रसूखदार हो बच नही पाएगा। वह रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे करेंगे।
मुहाफिज खाने में दाखिल खतौनी से हुई शुरुआत
सूत्रों की माने तो सदर मालखाने में रामनगर बगहा की दाखिल खतौनी सन फसली 1388-1393 में हेराफेरी करके तत्कालीन लेखपाल ने उसकी नकल निकलवाई और नकल के हिसाब से तालाब रास्ते नवीन परती बंजर घूरा खलिहान मरघट की करीब 15 सौ एकड़ भूमि पर दर्जनों भूमाफिया ने तत्कालीन लेखपाल से दुरभिसंधि करके अपने नाम खतौनी में दर्ज करा लिए।