सोमवार की सुबह रोज की तरह विद्यालय में आठ बजे से कक्षाएं शुरू हुईं। पढ़ाई शुरू होने के बाद भी नौ से 12वीं तक के छात्र कक्षाओं में नहीं पहुंचे तो शिक्षकों ने वॉर्डन को हॉस्टल भेजकर बच्चों को बुलाने की बात कही। वॉर्डन पहुंचे तो देखा कि वहां पर करीब 160 छात्र नीलगिरि हॉस्टल का गेट बंद कर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों ने सोशल मीडिया पर एक लेटर व एक वीडियो वायरल करके प्रधानाचार्य पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
इधर, वॉर्डन की सूचना पर प्रधनाचार्य व शिक्षक हॉस्टल पहुंचे और बच्चों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे अपनी जिद पर अड़े रहे। उनका आरोप था कि बच्चों के प्रति विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा गलत रवैया अपनाया जा रहा है। छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, जिससे हॉस्टल व परिसर में भय का माहौल है।
प्रकरण की जानकारी मिलने पर दोपहर में यहां पहुंचे नवोदय विद्यालय समिति के सहायक आयुक्त सुमन कुमार ने प्रधानाचार्य एसके सक्सेना को 15 दिन की छुट्टी पर भेजने व जांच के बाद निलंबन की कार्रवाई का लिखित आदेश बच्चों को पढ़कर सुनाया। इसके बाद भी जब बच्चे नहीं माने तो शाम पांच बजे तहसील प्रशासन के कर्मचारियों ने कटर से हॉस्टल की कुंडी काटकर छात्रों को बाहर निकाला।
इस दौरान करीब 10 घंटे तक छात्र भूखे-प्यासे रहे। देर शाम जब बच्चों को बाहर निकाला गया तो मितौली बच्चों को खींचते हुए बाहर लाए। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। एक वीडियो में तीन छात्र चेहरे पर गमछा बांधे दिखाई दे रहे हैं। ये छात्र फंदा लगाते दिख रहे हैं।
जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि प्रकरण में एसडीएम मितौली व मोहम्मदी सहित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को मौके पर भेजकर छात्रों को शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हॉस्टल के दरवाजे की कुंडी काटकर सभी छात्रों को सकुशल बाहर निकाला गया।