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जमींदोज हुआ 134 साल पुराना बांकेगंज रेलवे स्टेशन

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जमींदोज हो गया बांकेगंज का पुराना रेलवे स्टेशन।
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1887 में कुकरा स्टेशन के नाम से बना था बांकेगंज कस्बे में रेलवे स्टेशन
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बांकेगंज। कस्बा समेत क्षेत्र के लोगों की कई खट्टी-मीठी यादों को सहेजने वाला 134 साल पुराना बांकेगंज रेलवे स्टेशन आखिरकार जमींदोज हो गया। इसको ढहते देख कई पुराने लोगों की आंखें भर आईं।
वर्ष 1887 में लखीमपुर से गोला तक मीटरगेज ट्रेनों का संचालन शुरू होने के साथ ही बांकेगंज कस्बा में रेलवे स्टेशन का निर्माण शुरू हुआ था। हालांकि स्टेशन पर पहली ट्रेन एक अप्रैल 1891 को पहुंची थी। इसी के साथ क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हुई। ट्रेन के सफर के साथ बांकेगंज और आसपास के लोगों के तमाम खट्टे-मीठे अनुभव जुड़ते चले गए। कोई इसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होकर उच्चशिक्षा के लिए बड़े श्हर पहुुंचा और बड़ा अफसर बनने के बाद इसी रेलवे स्टेशन से अपने घर आया। बहुत से लोगों की बारातें इसी स्टेशन से रवाना हुईं और अपनी नई नवेली दुल्हन को पहली बार विदा कराकर इस स्टेशन पर होकर घर पहुंचे। यह वही रेलवे स्टेशन है जिस पर तमाम युवा जोड़ों के प्यार परवान चढ़े तो कई ने इसी स्टेशन से अपने प्रेमी या प्रेमियों की जुदाई देखी।
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मौजूदा समय में प्रयागराज मंडल के कमिश्नर और बांकेगंज कस्बा निवासी आईएएस अफसर संजय गोयल बताते हैं कि वे इसी रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार होकर पढ़ाई करने के लिए दिल्ली गए थे और वर्ष 2004 बैच में वहां से आईएएस बनकर इसी रेलवे स्टेशन पर अपने घर लौटे। इसी तरह 1975 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पंकज सिन्हा बताते हैं कि वे इसी रेलवे स्टेशन से पहले लखीमपुर फिर इलाहाबाद पढ़ाई करने गए थे। वहीं से आईएएस बनकर इसी स्टेशन से घर लौटे थे।
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बांकेगंज कस्बा में रेलवे स्टेशन होते हुए भी इस स्टेशन का नाम कुकरा रेलवे स्टेशन रखा गया, लेकिन करीब 25 साल पहले इस स्टेशन का नाम बदलकर बांकेगंज किया गया। आमान-परिवर्तन होने पर पुराने रेलवे स्टेशन से थोड़ा हटकर नए रेलवे स्टेशन का निर्माण कराया गया और पुराने रेलवे स्टेशन को निष्प्रयोज्य घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। जब लोगों ने पुराने रेलवे स्टेशन को टूटने की खबर सुनी तो कस्बे के बहुत से लोग अपनी यादें ताजा करने के लिए वहां पहुंचे। लोगों ने एक दूसरे से अपने संस्मरण साझा किए। (संवाद)
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