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गोशाला में समस्याओं का अंबार, गोवंश हो रहे बीमार

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लखीमपुर खीरी। शहर में घूम रहे लावारिस गोवंश से लोगों को निजात दिलाने के लिए पालिका की गोशाला में अव्यवस्थाओं का अंबार है। आए दिन गोवंश बीमार हो रहे हैं। गोशाला में न तो साफ सफाई की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही उनके रहने और चारा पानी की। हालांकि इस मामले में पालिका प्रशासन का कहना है कि ये गोशाला अस्थाई है और स्थाई गोशाला का निर्माण शहर के बाहर करीब तीन एकड़ भूमि पर कराया जा रहा है, जिसके बनते ही गोवंश वहां भेज दिए जाएंगे।
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शासन के निर्देश पर पालिका ने केंद्रीय विद्यालय के समीप बनी पानी की टंकी के नीचे गोवंश को रखना शुरू कर दिया। मौजूदा समय में वहां पर 48 गोवंश मौजूद हैं, जिसमें से छोटे बड़े बछड़ों की संख्या जहां 26 है तो वहीं गायों की संख्या 21 है। गंदगी से होने वाले संक्रमण और चारे पानी की कमी के चलते अब तक आठ गोवंशीय मौत का शिकार हो चुके हैं।

गोवंश के लिए कम पड़ रहा तीस रुपये निर्धारित बजट
पालिका ने प्रत्येक गोवंश के लिए तीस रुपये निर्धारित कर रखे हैं। जो उनके चारे पानी के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि बाजार में भूसा 12 रुपये, हरा चारा दस रुपये, चोकर करीब 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। एक गोवंश को एक दिन में कम से कम तीन किलो दाना, पांच किलो हरा चारा और सात किलो भूसे की आवश्यकता होती है।
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ये है चारा खिलाने का मानक
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी टीके तिवारी का कहना है कि वैसे तो पशु को कितना चारा देना है यह उसके वजन पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्य तौर पर एक पशु को रोजाना कम से कम तीन किलो दाना, पांच किलो हरा चारा, सात किलो भूसा मिलना ही चाहिए। सुबह यदि हरे चारे के साथ सूखा भूसा दिया जाए तो रात में सानी (गीला चारा) मिलना चाहिए।

चारा, पानी की नहीं है पर्याप्त व्यवस्था
जिस जगह पर 48 गोवंश रखे गए हैं वह सिर्फ दस से 15 गोवंश के लिए पर्याप्त है, लेकिन मजबूरी में रखे गए गोवंश के लिए पालिका ने पीने के पानी तक की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं की है। 48 पशुओं के पानी पीने के लिए सिर्फ दो नाद मौजूद हैं, जिसमें एक बाड़े में और एक बाहर। कुछ ऐसी हालत चारे की। इसके लिए वहां पर एक चन्नी और दो नाद मौजूद हैं।

एक कर्मचारी पर है जिम्मेदारी
गोवंशीय की देखरेख के लिए सिर्फ एक कर्मचारी तैनात है। जो चारा पानी से लेकर उनकी देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहा है। हालांकि रात में रुकने के लिए किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। जबकि 48 पशुओं की देखरेख के लिए कम से दो कर्मचारी दिन में और इतने ही रात में रहने चाहिए।

आठ गोवंश की हो चुकी है मौत
गोशाला में अव्यवस्थाओं और गंदगी के कारण आठ गोवंश की अब तक मौत हो चुकी है। दो दिन पूर्व एक ही दिन में चार पशुओं की मौत हो गई, जबकि चार पशुओं की इससे पहले मौत हो चुकी है। वहीं रविवार रात को एक 15 दिन का बछड़ा गंभीर बीमार हो गया, जिसकी हालत नाजुक बनी हुई है।

नगरवासियों को शहर में घूम रहे गोवंशीय से निजात दिलाने के लिए स्थाई गौशाला बनवाई गई है। जबकि खंभारखेड़ा में 16 बीघे में स्थाई गोशाला निर्माणाधीन है। उसके बनते ही सभी को वहां भेज दिया जाएगा।
- अखिलेश त्रिपाठी, ईओ पालिका लखीमपुर

गोवंश के चारे पानी से लेकर उनकी देखरेख के लिए गोशाला में पर्याप्त व्यवस्थाएं है। वहीं पशु अस्पताल की टीम भी रोजाना भ्रमण कर स्वास्थ्य परीक्षण करती है। जल्द ही इन सभी को स्थाई गोशाला में शिफ्ट कर दिया जाएगा
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- निरूपमा मौनी बाजपेई, अध्यक्ष पालिका परिषद लखीमपुर
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