एक हजार हेक्टेयर वनभूमि माफिया पर की नजर
बांकेगंज। सर्दियों का मौसम भी बरसात के मौसम की तरह वन विभाग के लिए संवेदनशील होता है। इन दिनों अवैध शिकार, कटान के साथ वन भूमि पर अतिक्रमण की चुनौती झेलनी पड़ती है। लखीमपुर और पीलीभीत जिलों में बाढ़ और कटान के बाद शारदा की छोड़ी पड़ी करीब एक हजार हेक्टेयर वनभूमि पर माफिया की नजर है। कई हेक्टेयर वनभूमि अवैध कब्जा हो गए और कब्जा की कोशिश चल रही है। सरकारी वनभमि को माफिया से बचाने के लिए वनविभाग के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व बफजोन की भीरा रेंज से सटकर शारदा नदी निकलती है। बरसात में नदी किसानों की जमीन के साथ ही वन भूमि का भी कटान करती है। जब नदी में पानी कम होता है,तब नदी सिमट कर अपने मूल स्थान पर चली जाती है। नदी की छोड़ी गई वन भूमि पर खीरी और पीलीभीत जिले के माफिया कब्जा करके गेहूं बोने का प्रयास करते हैं। इन दिनों जब वन विभाग कब्जेदारों को रोकने का प्रयास करता है तो माफिया वन कर्मियों से संघर्ष पर उतारू हो जाते हैं। वन भूमि की पैमाइश और सीमांकन करने में इतना समय लग जाता है कि अतिक्रमणकारियों की गेहूं फसल तैयार हो जाती है। इसी तरह माफिया वन भूमि पर काबिज होते जा रहे हैं। भीरा रेंज में ऐसे कई मामले हैं, जिनमें वन भूमि खाली कराने का प्रयास करने पर कब्जेदार कोर्ट जा चुके हैं। इससे वन विभाग को भूमि खाली कराने में दिक्कतें आ रही हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल बताते हैं कि भीरा रेंज से सटकर बहने वाली शारदा नदी की बरसात के बाद छोड़ी गई वन भूमि के मध्य शारदा की एक धारा बहती है। इसके बाद वन भूमि पर कब्जे की घटनाएं ज्यादा हो रहीं हैं। इसे खाली कराने के लिए और कब्जा रोकने के लिए वन कर्मियों को दुर्गम रास्तों से डनलप या ट्रैक्टर पर बैठकर शारदा नदी की धारा पार करके जाना पड़ता है। डीडी ने बताया कि प्रशासनिक द़ृष्टिकोण से यह भूमि खीरी जिले के वन विभाग के नियंत्रण में हैं। जबकि राजस्व अभिलेखों के मुताबिक यह भूमि पीलीभीत जिले का हिस्सा है। दो जिलों के बीच का मामला होने के कारण भी वन भूमि पर अतिक्रमण के मामलों का निस्तारण कठिन हो रहा है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की भीरा और संपूर्णानगर रेंज के शाहपुर, पतवारा, दौलतपुर, मटैय्या, बरूआ, कांप और महराजनगर में इस तरह के चार अवैध कब्जे हो चुके है। जिनके मामले न्यायालय में लंबित हैं। इन दिनों गेहूं बुआई का सीजन चल रहा है। नदियों की छोड़ी गई जमीन पर कब्जे के प्रयास शुरू हो गए है, और वन विभाग को इसकी रोकथाम के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
सर्दियों में बढ़ती हैं वन अपराध की घटनाएं
सर्दियों के मौसम में आमतौर पर जंगल गश्त शिथिल पड़ जाती है। तभी वन अपराध की घटनाएं ज्यादा बढ़ती हैं। इस दौरान जलौनी लकड़ी लेने के लिए जंगल में बड़ी संख्या में घुसपैठ होती है, और इसी बीच घुसपैठ करने वाले हिरन, जंगली सुअर आदि जीवों का शिकार भी कर लेते है। जंगल से पेड़ों के कटान की घटनाओं में भी सर्दियों में इजाफा हो जाता है। यहीं नहीं बाघ और तेंदुए के शातिर शिकारी भी सर्दियों में अधिक सक्रिय हो जाते हैं।
मानसून पेट्रोलिंग की तरह सर्दियों के मौसम में भी अवैध कटान, शिकार और अवैध अतिक्रमण जैसे वन अपराधों से निपटने के लिए वन कर्मियों की टीमें गठित की जा रही हैं। यह टीमें लगातार पेट्रोलिंग कर वन अपराध पर नियंत्रण करेंगी। इसके अलावा वन भूमि अतिक्रमण न हो इस पर वन विभाग बेहद गंभीर है। भीरा रेंज जंगल से सटी शारदा नदी कटान की छोड़ी गई वन भूमि पर अतिक्रमण न होने पाए इसके लिए वन कर्मियों की टीम संबधित वन भूमि की नियमित निगरानी कर रही है।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल,उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व,बफरजोन।