हाईकोर्ट ने नदियों में मूर्ति विसर्जन को लेकर लगाई रोक के बाद प्रशासन की तरफ से मूर्तियों का विसर्जन करने के लिए अलग से एक तालाब की व्यवस्था नदी के दूसरी तरफ की थी, लेकिन कोर्ट के आदेश पर प्रशासन पूरी तरह से अमल ही नहीं करा पाया। हर बार की तरह इस बार भी मूर्तियों का विसर्जन नदी में ही किया गया। हालांकि पुलिस प्रशासन ने एक नेता पर लोगों को भड़काकर तालाब की जगह नदी में विसर्जन करने का आरोप लगाया है।
हाईकोर्ट ने नदियों में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी थी। इसको लेकर प्रशासन की तरफ से अलग से एक तालाब नदी के दूसरी तरफ बनाया गया था। शुक्रवार देर शाम को एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने भी इस तालाब का निरीक्षण किया था। इसके बाद सुबह से ही तालाब के चारों तरफ से रास्ता बनाने के लिए एसओ विपिन कुमार सिंह, नगर पालिका के ईओ अशोक कुमार तिवारी, पालिकाकर्मी मेलाराम डटे थे।
सुबह से ही श्रीनगर के ग्रामीणों के सहयोग से तीन तरफ से तालाब जाने का रास्ता बनाया गया। दोपहर बाद से धीरे-धीरे मूर्तियों का आना शुरू हुआ, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने में प्रशासन पूरी तरह फेल रहा। मूर्तियों का विसर्जन इस बार भी शारदा नदी में ही किया गया।
इसका मुख्य कारण यह भी है कि तालाब में भीषण गंदगी थी। रास्ता भी सही तरीके से नहीं बनाया गया था। जिसके कारण विसर्जन के लिए उधर कोई गया ही नहीं। उधर, पुलिस प्रशासन ने एक नेता पर भड़काकर तालाब की जगह नदी में विसर्जन करने का आरोप लगाया है।
एसओ विपिन कुमार सिंह ने बताया कि एक नेता ने पहले अपनी दो मूर्तियों का विसर्जन नदी में करवाया। इसके बाद अन्य लोगों को बताकर उनको भी भड़काया, जिसके कारण हर जगह से आने वाली मूर्तियां नदी में ही विसर्जित हुईं। उन्होंने बताया कि भक्तों की भीड़ ज्यादा थी, जिसके कारण स्थिति ठीक रखने के लिए ज्यादा रोक-टोक नहीं की गई।