कहा-अब कभी लौटकर नहीं आएंगे, मासूमों की मौत से खत्म हुआ परदेश का नाता
सपहा (कुशीनगर)। छतीसगढ़ जाने की खुशियां एक पल में मातम में बदल गई। कुशीनगर के ईंट भट्ठे पर भरे पानी ने तीन छोटे बच्चों की जान ले ली। जिस परिवार को दो दिन बाद हंसते-खेलते गांव लौटना था, वे शनिवार की रात ही रोते-बिलखते बच्चों के शव लेकर चले गए। इस हादसे ने न केवल उनके माता-पिता को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। यहां से जाते समय परिजनों ने रोते हुए कहा कि वे अब कभी दोबारा मजदूरी के लिए इस ओर रुख नहीं करेंगे। जिस जगह ने उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी छीन ली, वहां की हर ईंट उन्हें अब बच्चों के गम की याद दिलाएगी।
रोजी रोटी की तलाश में सात सौ किलोमीटर दूर आए तीन मजदूर परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कसया क्षेत्र के दीनापट्टी स्थित एक ईंट भट्ठे पर शनिवार को जो हादसा हुआ,उसने लोगों को झकझोर दिया, शायद नियति को वही मंजूर था, न तो ऐसी घटना नहीं हुई होती।
पीड़ित परिवार मूल रूप से छतीसगढ़ के बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिले के रहने वाले हैं। ये परिवार पिछले साल नवंबर-2025 में ईंट भराई के सीजन में काम करने आए थे। बीते सात महीने की कड़ी मेहनत के बाद,अब उनका काम खत्म होने वाला था और दो दिन बाद ही उन्हें अपने घर छतीसगढ़ वापस लौटना था। परिजनों ने घर जाने की पूरी तैयारी कर ली थी। बच्चों के लिए कुछ नए सामान भी खरीदे गए थे,लेकिन एक हादसे ने सब कुछ उजाड़ दिया।
पोस्टमार्टम के बाद जब तीनों बच्चों अभय,अनुष्का और अनन्या के शव भट्ठे पर पहुंचे, तो वहां मौजूद हर मजदूर की आंखें नम थीं। बिलखते हुए माता-पिता उन बेजान शरीरों को लेकर रविवार को छतीसगढ़ पहुंचे, जहां उनके पैतृक गांव में गमगीन माहौल के बीच अंतिम संस्कार किया गया।
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टीम आज करेगी घटना की जांच
इस हादसे के जांच करने के लिए डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने गंभीरता से लेते हुए पांच सदस्यीय टीम गठित कर दिया था। गठित टीम से घटना को लेकर जांच रिपोर्ट तलब की है। ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके। एसडीएम कसया डाॅ.सतराज सिंह बघेल ने बताया कि ईंट भट्ठे पर तीन मासूमों की डूबकर हुई मौत की जांच की जानी है। गठित टीम के सदस्यों के साथ सोमवार को घटना स्थल का जायजा लिया जाएगा।