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Kushinagar News: मायाजाल में खुद फंस रही महिलाएं...किस्त रुकने के साथ शुरू हो जा रही मुश्किलें

Thu, 26 Dec 2024 07:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना/दुदही। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारियों के फैलाए मायाजाल में अनपढ़ महिलाएं खुद फंसकर शिकार बन रही हैं। बिना दस्तावेजों के रुपये पाने की लालच में अंग्रेजी में लिखी शर्तों को बिना समझे फॉर्म पर अंगूठा लगाने वाली इन महिलाओं की मुश्किलें किस्त रुकने के साथ शुरू हो जा रही हैं। दिन बीतने के साथ ही बढ़ती चली जा रही हैं। इसका असर उनके घर-परिवार पर भी पड़ रहा है। आए दिन हत्या, आत्महत्या, पारिवारिक कलह जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही है।
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दुदही, खड्डा, तमकुही, तरयासुजान आदि क्षेत्र बिहार से जुड़ा है। यहां बाढ़ की विभीषिका झेल रहे अधिकांश लोगों का आशियाना बिहार के साथ यूपी के इन इलाकों में हैं। बाढ़ का पानी कम होने पर वह बिहार में खेती करते हैं। जब पानी बढ़ता है तो वह कुशीनगर जिले के सीमांत इलाकों में चले आते हैं। दियारा के सीमांत इलाकों में फैली अशिक्षा को माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट ढाल बनाकर शिकार बनाते हैं। जानकारी के अनुसार, लोन देने की आड़ में यह उन महिलाओं या परिवारों का चयन करते हैं जो अनपढ़ हों और आसानी से उनके जाल में फंस जाएं। इसके बाद उन्हें लोन देने के नाम पर फॉर्म से अतिरिक्त कई ऐसे कोरम पूरा कराते हैं, जो उन्हें समझ में ही नहीं आता। इसमें अंग्रेजी भाषा का फॉर्म भी शामिल होता है। एजेंट पर भरोसा कर लोग बिना पढ़े ही अंगूठा और हस्ताक्षर कर देते हैं। इसका फायदा ब्याज पर लोन देने वाले लोग उठाते हैं। लोन देने के नाम पर समूह के सदस्यों से इन हस्ताक्षर किया हुआ ब्लैंक चेक भी अपने पास बतौर गारंटी रख लेते हैं। बाद में किस्त देने के नाम पर इतनी ब्याज राशि जोड़ी जाती है जो शासन के मापदंडों और नियम-कानून के विपरीत होती है। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारियों एवं समूह लीडर मिलकर भोले-भाले गरीब अनपढ़ लोगों को निशाना बना कर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं।

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दुदही, खड्डा और तमकुहीराज में एजेंट अधिक सक्रिय

क्षेत्र से जुड़े लोगों की मानें तो फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों को कंपनी की ओर से रोजाना टारगेट दिया जाता है। इसे पूरा करने पर उन्हें अच्छे वेतन के साथ मोटा कमीशन मिलता है। जब इनका टारगेट नहीं पूरा होता है तो वह अधिक होकर खड्डा, दुदही और तमकुहीराज आदि क्षेत्रों में शिकार की तलाश में निकल जाते हैं। अब इन क्षेत्रों में कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या इतनी ज्यादा हो चुकी है कि आए दिन उत्पीड़न और अन्य मानसिक प्रताड़ना की घटनाएं सामने आ रही हैं।
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एजेंट के उत्पीड़न से परेशान होकर खाया था जहर
-क्षेत्र की जंगल नौगांवा गांव की एक 50 वर्षीय खुशनुमा ने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट की उत्पीड़न से आजिज आकर जहर खा लिया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। गांव के लोगों ने चंदा लगाकर इलाज कराया तो उसकी जान बच सकी। गांव में ऐसी कंपनी के ऋणजाल में फंसने वाली यह अकेली नहीं हैं। कर्ज के जाल में फंसकर कई महिलाओं के खेत बिक चुके हैं, जबकि दर्जनों महिलाएं घर छोड़कर फरार हैं।
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पहले उलझा कर दिया किस्त... फिर प्रताड़ना से जोनहिया देवी ने छोड़ा घर

- जोनहिया देवी का पति कोई काम नहीं करता है। पति गंभीर रूप से बीमार हैं। समूह की लीडर ने इसे लोन दिलाने के नाम पर फॉर्म पर हस्ताक्षर करा लिए और 35 हजार और 40 हजार का दो अलग-अलग कंपनियों से लोन उठा लिया। महिला को दोनों में से एक-एक हजार इलाज के लिए दे दिए। कुछ दिन समूह लीडर ने किस्त भरी। बाद में जब किस्त भरना बंद हुआ तो फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी जोनहिया के घर आकर प्रताड़ित करने लगे। दिन में सरेह और रात में दूसरे के घर रह रही थी।
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साहूकार से जटिल है कार्यप्रणाली
-माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के मकड़जाल में ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार फंस चुके हैं। इन कंपनियों की कार्यप्रणाली पुराने जमाने के साहूकारों से भी जटिल बताई जाती है। आसानी से कर्ज मिलने की लालच में जरूरतमंद ग्रामीण इनकी हर बात मानते चले जाते हैं, मगर एक बार रकम ले लेने के बाद अदा करने में उनकी उम्र बीत जाती है। बाद में किस्त जमा न होने पर परिवार को प्रताड़ित करते हैं। जिले में विभिन्न नामों से दर्जन भर से ज्यादा कंपनियां कस्बों में कार्यालय खोलकर अपने एजेंट के जरिए मजदूर वर्ग का समूह बनाकर उन्हें लोन देने का कार्य कर रही हैं। इलाज, जरूरत का सामान खरीदने, शादी-विवाह या अन्य आवश्यकता होने पर गरीब तबका यह सोचकर उनसे लोन ले लेता है कि धीरे-धीरे कमाई कर किस्त भर देंगे। भारी भरकम ब्याज के कारण वह समय से किस्त अदा नहीं कर पाते। जानकारों का कहना है कि ऋण स्वीकृत होने के बाद रकम का एक हिस्सा प्रोसेसिंग चार्ज व बीमा के नाम पर काट लिया जाता है। यानी अगर किसी का 30 हजार रुपये ऋण स्वीकृत हुआ तो उसके हाथ में बमुश्किल 24-25 हजार रुपये ही आते हैं।

.दुलही जाने वाला संपर्क मार्ग। संवाद

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