पडरौना। जिले में महिलाओं की डिजिटल पहुंच तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के ताजा आंकड़ों के अनुसार एक वर्ष में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या करीब दोगुनी हो गई है। वहीं, घर के निर्णय लेने में भी महिलाओं की दबदबा बढ़ा है।
एनएफएचएस-5 में जहां केवल 25 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 40-50 प्रतिशत पहुंच गया है। एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट मई में जारी हुई है, जबकि एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट मई 2022 में जारी हुई थी। सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि इंटरनेट के साथ-साथ महिलाओं की वित्तीय और सामाजिक भागीदारी में भी सुधार दर्ज किया गया है।
बैंक खाते का स्वयं संचालन करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 78 प्रतिशत से बढ़कर करीब 90 प्रतिशत हो गया है। मोबाइल फोन का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या भी 45 प्रतिशत से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत पहुंच गई है। आंकड़ बताते हैं कि महिलाएं अब आर्थिक और डिजिटल दोनों स्तरों पर अधिक आत्मनिर्भर हो रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से भी राहत भरी तस्वीर सामने आई है। इसी प्रकार घरेलू निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी में महिलाओं का दबदबा बढ़ा है। अब 80 प्रतिशत महिलाएं घरेलू निर्णय में सीधे तौर पर भागीदारी निभा रही हैं।
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इंटरनेट मनोरंजन के साथ ही सशक्तीकरण का माध्यम है। समय के साथ महिलाओं में इंटरनेट का उपयोग बढ़ा है। वे अपने अधिकारों के लिए जागरूक हो रही हैं। आने वाले दिनों में और अधिक सकारात्मक बदलाव नजर आएंगे। -डॉ. नरेंद्र त्रिपाठी, अध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, उदित नारायण पीजी कॉलेज, पडरौना।
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समाज में तेजी से बदलाव हो रहा है। पुरुषों के साथ महिलाओं की भागीदारी भी हर क्षेत्र में बढ़ी है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं घर में अधिक समय देती हैं। ऐसे में घर में क्या होना चाहिए? इसकी महिलाओं को जानकारी रहती है। इसलिए महिलाओं का निर्णय परिवार के विकास को गति देगा। यह बदलाव समाज को तेजी के साथ आगे ले जाएगा। - प्रोफेसर सीमा त्रिपाठी, मनोविज्ञान विभाग, बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर।