रामकोला। मौनी अमावस्या पर प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करने की तमन्ना लेकर गई 40 वर्षीय बसंती का छोटी बहन गुड़िया का साथ गोरखपुर में ही रेलवे स्टेशन पर छूट गया। दोनों के बीच पूरे रास्ते सिर्फ मोबाइल से बातें होती रही। प्रयागराज में मुलाकात होना थी।
गोरखपुर से साथ छूटने के बाद गुड़िया ट्रेन से गई और ट्रेन में दाखिल होने में असमर्थ बसंती बस से रवाना हुई। भीड़ इतनी थी कि दोनों की मुलाकात नहीं हो सकी और स्नान करने के बाद दोनों एक दूसरे से मिलने की बात कही थी, लेकिन भगदड़ के दौरान गुड़िया भी साथ गए लोगों से बिछड़ गई तो बड़ी बहन बसंती को फोन करने लगी।
करीब 30 बार फोन करने के बाद पुलिसकर्मी ने फोन रिसीव किया और मेला परिसर में बने अस्पताल में आने को कहा। घायल होने की बात मोबाइल पर नहीं बताई। वहां पहुंचने के बाद दीदी की हालत देख गुड़िया चीखने लगी, लेकिन हिम्मत जुटाई और मेडिकल कॉलेज प्रयागराज लेकर पहुंची, जहां इलाज के दौरान बसंती ने दम तोड़ दिया। आंखों में आंसू लेकर महाकुंभ में हुई भगदड़ का जिक्र करते हुए गुड़िया बोली कि गंगा मईया को यही मंजूर था। रामकोला के बगहा खुर्द गांव निवासी 40 वर्षीय बसंती और गोरखपुर में रहने वाली इसकी छोटी बहन गुड़िया ने महाकुंभ में स्नान करने के लिए प्लान बनाया था। 27 जनवरी को बसंती घर से निकली दोनों बहनों की मुलाकात गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर होनी थी। स्टेशन पर भीड़ इतनी थी कि दोनों बहने बिछड़ गईं। ट्रेन में गुड़िया दाखिल हो गई और बसंती की ट्रेन छूट गई। महाकुंभ में स्नान करने की श्रद्धा लेकर घर से निकली बसंती हिम्मत नहीं हारी और बस से प्रयागराज के लिए गोरखपुर से रवाना हो गई।
रातभर दोनों बहनों के बीच मोबाइल से बातें होती रही। दो घंटे के अंतराल पर दोनों की ट्रेन और बस प्रयागराज पहुंची। गुड़िया के साथ इसके मोहल्ले के भी लोग थे, इसके चलते वह पहले कुंभ मेला में चली गई और बाद में बसंती पहुंची। स्नान के बाद दोनों उधर से घर साथ आने वाली थी। घर वालों से भी बात कह बसंती बताई थी। भगदड़ के बाद गुड़िया भी मोहल्ले वालों से बिछड़ गई। गुड़िया ने बताया कि तीन घंटे तक भीड़ में फंसी रही।