पडरौना। रोजगार की तलाश में विदेश जा रहे युवाओं के सपनों को जालसाज चकनाचूर कर रहे हैं। एजेंट और ट्रैवल एजेंसी संचालकों के चक्कर में फंसकर बेरोजगार ठगी का शिकार हो रहे हैं। ड्राइवर की नौकरी के लिए जाकर विदेशों में उन्हें भेड़-बकरियां और ऊंट चराने पड़ रहे हैं। परिवार के सदस्य उनकी यह दर्द भरी दास्तान सुनाकर जिम्मेदारों से वतन वापस बुलाने की गुहार लगा रहे हैं।
अधिक रुपये कमाने की चाह में विदेश जाकर फंसे युवा अब वापसी के लिए तड़प रहे हैं। न तो समय से खाना और न ही समय से वेतन ही मिल पा रहा है। यही नहीं, जिले के ही रहने वाले एक युवक को सऊदी अरब में दुर्घटना के दौरान घायल की मदद करने के मामले में जेल की हवा भी खानी पड़ी है। कई और युवक भी हैं, जो जालसाजों के सुनहरे सपनों के जाल में फंसकर विदेश पहुंच चुके हैं और अब उनके परिजन वतन वापस बुलाने के लिए सोशल मीडिया से लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं।
नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के सरपतही गांव निवासी गुड्डू यादव घर की माली हालत सुधारने के लिए करीब आठ माह पूर्व सऊदी अरब गया था। यहां के एक स्थानीय एजेंट की मदद से वह सऊदी अरब पहुंचा। गुड्डू की पत्नी अर्चना यादव ने बताया कि जब पति ने विदेश जाने की इच्छा जताई। एक एजेंट ने सऊदी अरब में चालक की जगह बताई। गाड़ी चलाने में सक्षम उसके पति ने इस नौकरी के लिए हामी भर दी। एजेंट की मदद से वह मुंबई पहुंचा, जहां से वह हवाई जहाज में बैठकर सऊदी अरब चला गया। वहां जाने के बाद चालक की जगह उसे ऊंट और बकरियों को चराने का काम दिया गया। पहले तो उसे लगा कि कोई उसे परख रहा है कि वह काम करने योग्य है या नहीं। लेकिन, जब महीने भर काम करने के बाद चालक के लिए आने की बात कही तो कफील ने उसे ऊंट और बकरियों की देखभाल के लिए बुलाने की बात बताई। पिछले आठ महीने से गुड्डू सऊदी अरब में ही फंसा है।
अर्चना के अनुसार, उसके पति को समय पर भोजन तक नसीब नहीं होता। न तो वेतन दिया जा रहा है और उसे बीमार होने पर दवा भी नहीं उपलब्ध कराई जा रही है। इससे उसके पति की हालत खराब है। सोशल मीडिया पर भारतीय राज दूतावास से भी परिजनों ने वतन वापसी की गुहार लगाई है।
सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे पहल : विदेशों में फंसे भारतीय कामगारों की आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फंसे हुए लोगों के वतन वापसी की पहल की है। प्रवासी मदद फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप पांडेय व विजय मद्धेशिया ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। काम की तलाश में जब मजदूर विदेश जाते हैं तो वहां पर उन्हें कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ती है। बड़ी मुश्किल से वह वतन लौट पाते हैं। ऐसे में सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। हर साल बड़ी संख्या में लोग दलालों के चक्कर में आकर काम के लिए विदेश चले जाते हैं और चंद महीनों बाद वहां मजदूरों के समक्ष कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।
इसके बाद दलाल कुछ कर नहीं पाता या फरार हो जाता है। यह सिलसिला लंबे समय से जारी है। लेकिन, गरीबी-बेरोजगारी के कारण लोगों को विदेश जाना ज्यादा आसान लगता है। कुशीनगर के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार प्रांत के कामगार भी वहां बड़ी संख्या में फंसे हैं। उन सबकी वापसी के लिए परिजन गुहार लगा रहे हैं। संस्था लगातार प्रयासरत है। कुछ कामगारों की इस महीने वतन वापसी भी हो सकती है।