सपहां। बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर में नवनिर्मित पालि भवन में महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कृषि कक्षाएं संचालित करने की प्रशासनिक तैयारियों में तेजी देखी जा रही है। शासन की इस योजना का स्वागत करने के साथ ही कुशीनगर भिक्षु संघ और बौद्ध विद्वानों ने कॉलेज प्रशासन से पालि भाषा की पढ़ाई के लिए आवाज उठाई है।
भिक्षुओं का कहना है कि जिस पालि भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए लाखों रुपए की लागत से इस भवन का निर्माण कराया गया था, आज कृषि कक्षाए संचालन की सुगबुगाहट के बीच पालि भाषा की पढ़ाई को तवज्जो मिलना चाहिए। भिक्षु संघ और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग ने कॉलेज प्रबंधन से कहा है कि कृषि कक्षाओं के साथ ही पालि भाषा की पढ़ाई भी शुरू होनी चाहिए। इससे स्व. भिक्षु एबी ज्ञानेश्वर का मूल संकल्प साकार होगा। इसके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
बौद्ध भिक्षुओं का कहना है कि पालि की पढ़ाई शुरू होने से यहां न केवल दूसरे देशों से विद्यार्थी आएंगे और वैश्विक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बुद्ध के शांति संदेश का भी प्रचार-प्रसार होगा। कॉलेज प्रशासन को इसी सत्र से दोनों कक्षाएं एक साथ शुरू कराने के लिए पुरजोर कोशिश करने की जरूरत है। बौद्ध भिक्षुओं ने कहा है कि पालि की पढ़ाई शुरू कराने में भी कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।
कोट
कृषि ही नहीं, पालि भाषा की भी पढ़ाई शुरू होगी। प्रशासन की तरफ से पालि भवन का उपयोग कृषि की पढ़ाई के लिए सिर्फ कुछ महीने ही किया जाएगा। कृषि विवि का निर्माण पूरा होते ही कक्षाएं नवनिर्मित भवन से संचालित होंगी। पालि की कक्षाएं भी जल्द शुरू होंगी, तैयारियां करीब पूरी हो गई हैं। -भंते महेंद्र, उपाध्यक्ष, प्रबंध समिति बुद्ध पीजी कॉलेज, कुशीनगर
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पालि भाषा की पढ़ाई को लेकर बौद्ध भिक्षु बोले
हम कृषि कक्षाओं का स्वागत करते हैं। पूज्य भिक्षु एबी ज्ञानेश्वर जी ने जिस पालि भवन को लाखों रुपये की लागत से बनवाया, अगर वहां पालि की पढ़ाई नहीं की जाएगी तो उनका मकसद अधूरा रह जाएगा। कॉलेज प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर पालि की कक्षाएं शुरू करनी होगी। -भिक्षु डाॅ. नंदरतन थेरो, सचिव भिक्षु संघ, कुशीनगर
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कृषि के साथ पालि की पढ़ाई होने से कुशीनगर की वैश्विक ख्याति बढ़ेगी। वैश्विक संबंध और मजबूत होंगे। इससे पर्यटन व्यवसाय को पंख लगेंगे। रोजगार के अवसर के साथ स्थानीय लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी। इसलिए पालि भाषा की पढ़ाई शुरू कराए जाने के लिए ठोस पहल करने की जरूरत है। -भिक्षु चंदिमा थेरा, पूर्व अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ
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कृषि के साथ पालि भाषा की पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। इसमें किसी तरह की हीलाहवाली नहीं होनी चाहिए। पूज्य गुरु एबी ज्ञानेश्वर जी ने पालि भाषा की पढ़ाई के लिए कॉलेज परिसर में पालि भवन का निर्माण कराया था। अब वह नहीं हैं, इसलिए पालि भाषा की ही पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। -भंते अशोक, कोषाध्यक्ष, भिक्षु संघ कुशीनगर
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पालि भाषा की पढ़ाई शुरू होने से विश्व के तमाम देशों से विद्यार्थी आएंगे। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि महात्मा बुद्ध के उपदेशों को वैश्विक मंच मिलने के साथ प्रचार-प्रसार में वृद्धि दर्ज होगी। नवनिर्मित पालि भवन में पालि भाषा ही पढ़ाई शुरू होनी चाहिए। -टीके राय, टूर प्रमोटर, कुशीनगर