गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा, दशहत में लोग
- नेपाल से छोड़ा गया दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। नेपाल की पहाड़ियों सहित खड्डा क्षेत्र में हो रही बारिश का असर शुरू हो गया है। गंडक नदी जलस्तर बढ़ने से लोगों में दहशत है। दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी पार बसे गांव पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
खड्डा क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर 64 मिमी बरसात हुई है। बुधवार को पानी बरसने से किसानों के चेहरे खिल गए। लेकिन बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, सालिकपुर ,महदेवा सहित अन्य गांवों में लोग बाढ़ के खतरे से सहम गए हैं। नेपाल से छोड़े गए पानी और बारिश की पानी की वजह से गंडक नदी उफनाने लगी है। एक दिन पहले 28 जून की दोपहर 12 बजे वाल्मीकि बैराज से यूपी के नहरों में 1,23,400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। 29 जून के 12 बजे नदी व नहरों को मिलाकर 2,03000 क्यूसेक डिस्चार्ज हो गया है। इसमें अभी भी बढ़ाव जारी है।
जलस्तर बढ़ने से मंडराया बाढ़ का खतरा
गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज दो लाख क्यूसेक से अधिक पहुंचने से नदी में उफान नदी नजर आने लगा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के निचले हिस्सों में पानी भरने लगा है। बसंतपुर से सोहगीबरवा जाने वाली सड़क जलमग्न हो गई है। कटबासी नाले में नदी का पानी भरने लगा है। इस वजह से बसंतपुर व मरचहवा दक्षिण टोला जाने वाली सड़क पर भी पानी चढ़ना शुरू हो गया है। ग्रामीण नथुनी, विजयी, धूरूप, बुनेला,नंदू आदि ने बताया की बाढ़ के खतरे की आशंका बनी हुई है।
जंगल के भीतर का रास्ता हुआ खतरनाक
नदी में जलस्तर बढ़ने से भैसहा घाट से प्राइवेट नाव से भाड़ा देकर नदी पार करने में परेशानी शुरू हो गई है। खड्डा आने-जाने के लिए पनियहवा पुल के रास्ते बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल के बीच से नौरंगिया पहुंचना पड़ रहा है। यहां से सोहगीबरवा तक जाने वाली जंगल के बीच सड़क काफी खराब है जिससे वाहनों का आवागमन नहीं ठप है। साइकिल और पैदल चलना भी मुश्किल हो चला है।