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नेपाल में बारिश से गंडक में पानी बढ़ा, बढ़ने लगी दहशत

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नेपाल में बारिश से गंडक में पानी बढ़ा, बढ़ने लगी दहशत
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खड्डा। नेपाल में हो रही बारिश के चलते गंडक में पानी बढ़ने लगा है। 15 जून के बाद गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक के करीब पहुंच गया है। भैंसहा गेज स्थल पर चेतावनी बिंदु के नजदीक जलस्तर पहुंचने से लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।
अचानक जलस्तर बढ़ने से तबाही मचाने के लिए जानी जाने वाली इस नदी से लोग सहमे-सहमे से हैं। नेपाल में पहाड़ों में हो रही बारिश से इस नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को भारत-नेपाल सीमा पर वाल्मीकि गंडक बैराज से दोपहर 12 बजे नदी में 93300 (तिरानवे हजार तीन सौ) क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो इस सीजन में अब तक का ज्यादा जल है।
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सुबह आठ बजे पानी 69600 क्यूसेक था। पानी छोड़ने के बाद यह अचानक बढ़ गया। खड्डा क्षेत्र के भैंसहा गेज स्थल पर सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 94.94 मीटर दर्ज हुआ। यह चेतावनी बिंदु 95.00 मीटर से मात्र छह सेंटीमीटर कम है, जबकि अभी तक बारिश दो मिलीमीटर हुई है।
पिछले साल गंडक में चार लाख बारह हजार क्यूसेक हुआ था डिस्चार्ज
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पिछले साल गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज 4,12,000 (चार लाख बारह हजार) क्यूसेक हुआ था। इस वजह से कई इलाकों में बाढ़ आ गई थी। गंडक नदी पार बाईं तरफ बसे मरचहवा, बसंतपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, शिवपुर, बकुलादह, शाहपुर, विंध्याचलपुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं।
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यहां के लोगों तक सहायता पहुंचाना प्रशासन के लिए चुनौती बन जाती है। बाढ़ के समय पूरा क्षेत्र सड़क से कट जाता है। यहां पहुंचने के लिए जंगल के रास्ते या मुख्य नदी की बेगवती धारा में नाव की मदद लेनी पड़ती है। एक से दूसरे गांव में भी नाव से आना-जाना पड़ता है। लोगों को मचान, छप्पर या ट्रैक्टर-ट्राली पर अस्थायी रूप से आश्रय लेना पड़ता है। बाढ़ आने पर सबसे अधिक परेशानी पशुओं व बच्चों और महिलाओं को उठानी पड़ती है। जवाहिर, नंदू, बेचन, अनिल, इशहाक, नथुनी, जयराम, कुसुमकली आदि ने कहा कि हर साल बरसात के समय जीवन नर्क के समान हो जाता है।
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