पडरौना। मानसून आने में करीब एक महीने की देरी है, लेकिन अभी तक शहर में जलभराव से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं हो पाया है। नाले भी चोक हैं। ऐसे में समय रहते जलभराव से बचाव का इंतजाम नहीं किया गया तो अंबेडकर नगर (नौका टोला), तिलक नगर (तुलसी आवास कॉलोनी), गरुण नगर, अंबे चौक, छावनी सहित कई मोहल्लों के लोगों को फिर से जलभराव से जूझना पड़ सकता है।
बरसात अभी करीब एक माह दूर है, लेकिन उसका जिक्र सुनते ही इन मोहल्लों के लोग परेशान हो जाते हैं। नगर पालिका प्रशासन से शहर के लोगों की उम्मीद है कि इस बार जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाया जाएगा, जिससे बार-बार की जलभराव की समस्या से निजात मिल सके। पडरौना शहर के रामकोला रोड के किनारे करीब 27 वर्ष पहले तुलसी आवास विकास कॉलोनी के नाम से नई कॉलोनी बसाई गई थी। अलग-अलग फेज में बसी यहां की कॉलोनियों में जलनिकासी का समुचित इंतजाम नहीं हो पाया। चूंकि, रामकोला रोड एनएच-28बी भी है, जिसकी ऊंचाई इस कॉलोनी की सड़कों से करीब दो फीट अधिक है। ऐसे में बारिश का पानी इस कॉलोनी में भर जाता है। यह स्थिति बरसात के दिनों में अधिक होती है।
यदि बारिश कई दिनों तक होती रह गई तो फिर क्या कहने। लोगों को जलभराव युक्त सड़क से होकर ही आना जाना पड़ता है। यह पॉश कॉलोनी मानी जाती है। हालांकि नगर पालिका की तरफ से इस कॉलोनी में सड़क और जलनिकासी के लिए नाली का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन बहुत देर से काम शुरू होने से सड़क और नाली का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य जिस गति से चल रहा है उसे देख लग रहा है इस बार बरसात में जलनिकासी की समस्या से निजात मिलने वाली नहीं है।
इसी तरह पडरौना शहर की एक बड़ी आबादी वाला छावनी मोहल्ला भी है। इस मोहल्ले में तहसील से पहले कसया रोड से निकलकर बीच मोहल्ले से होते हुए मोगलपुरा में मिलने वाली सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त केवल इसलिए हो गई, क्योंकि बरसात के दिनों में बारिश का पानी इस सड़क पर घुटने तक भर जाता है। उस दशा में इस रास्ते गुजरना काफी दूभर होता है।
नालियां जाम होने के कारण जलनिकासी नहीं हो पाती, जिससे जलभराव की स्थिति घंटों तक बनी रहती है। जिनके घर का स्तर सड़क से नीचे है, उनके घरों में नालियों का गंदा पानी भी घुस जाता है। पडरौना शहर का मुन्ना कॉलोनी और तिलक नगर भी शहर के पॉश कॉलोनियों में गिना जाता है, लेकिन बरसात के दिनों में इस मोहल्ले की हालत भी बदतर हो जाती है। यहां बरसात की कौन कहे, गर्मी के दिन में भी खाली पड़े आवासीय प्लॉटों में एक से दो फीट तक पानी भरा हुआ है।
जलभराव और गंदगी के कारण मच्छर पनप रहे हैं, जिससे लोगों को मच्छरजनित बीमारियों के पनपने की चिंता बनी रहती है। बरसात के दिनों में तो यह मोहल्ला टापू की तरह दिखने लगता है। सड़क और आवासीय प्लाॅटों में पानी भरा होता है। उसके बीच मकान ही नजर आते हैं। यह समस्या साल दर साल बनी रहती है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं देते। यही हाल शहर के एनएच-28बी के किनारे स्थित नौका टोला (आंबेडकर नगर) की हो जाती है।
इस मोहल्ले का दूषित पानी बरसात के दिनों में निकल नहीं पाता है। नतीजा यह होता है कि पूरे मोहल्ले में घुटने तक पानी भर जाता है। इस मोहल्ले में जिनके घर नीचे हैं, उनके घरों में नालियों का गंदा पानी चला जाता है। उसके साथ कीड़े-मकोड़े भी घरों में प्रवेश कर जाते हैं। हालत यह होती है कि लोगों को न तो घरों में रहते बनता है और न बाहर।
यहां के लोगों की मानें तो अब तक इस मोहल्ले की नालियों और पुलियों की सफाई नहीं हुई है, जिससे जलभराव से छुटकारा मिल सके। यहां के लोग अभी से चिंतित हैं कि यदि समय रहते नालों और नालियों की सफाई नहीं कराई गई तो जलभराव का सामना इस बार भी करना पड़ेगा।
बरसात में दिनों में शहर के गरुणनगर मोहल्ले के बाशिंदों की दुश्वारियां भी बढ़ जाती हैं। क्योंकि नालों और नालियों की सफाई न होने के कारण बरसात का पानी निकल नहीं पाता। इससे मोहल्ले में जलभराव हो जाता है। लोगों का अपने घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो जाता है।