कुशीनगर। नारायणी नदी में उतार-चढ़ाव के बीच तटवर्ती गांवों के लोगों को बाढ़ की चिंता सता रही थी। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे अफसरों की गाड़ियों नदी उस पार शिवपुर गांव और बंधों पर पहुंची तो लोग हैरान रह गए। अफसरों ने ग्लेशियर झील फटने की जानकारी देते हुए नारायणी में तेज उफान की बात कही और गांव वालों को ऊंचे स्थान पर जाने के लिए कह दिया। इतना सुनते ही गांव वाले दहशत में आ गए। मवेशियों के साथ खुद के लिए सुरक्षित ठौर तलाशने लगे। बाढ़ के खौफ में नारायनपुर, शिवपुर, सालिकपुर, मरचहवा आदि गांवों के लोगों ने जागकर रात गुजारी।
चीन-तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा जिले में भारी बारिश के बाद ग्लेशियर जनित झील फटने की सूचना ने नारायणी नदी के तटवर्ती इलाकों की जिंदगी थाम दी है। नदी में पानी बढ़ने की आशंका के बीच खड्डा और तमकुहीराज क्षेत्र के करीब 70 हजार लोगों की चिंता बढ़ गई है। नदी उस पार बसे गांवों में लोग घरों से जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। खेतों में काम करने गए किसान और मजदूरों को भी वापस बुला लिया गया है।
शाम 7 बजे
शाम करीब सात बजे नदी पार के बाढ़ प्रभावित मरचहवा गांव के दक्षिण टोला में लोग अंधेरे में घरों से बाहर बैठे हैं। चेहरों पर चिंता साफ दिखाई दे रही है। राधेश्याम, चंद्रिका, भोला, विष्णु, शिव, विनोद आदि ग्रामीण बाढ़ की स्थिति बिगड़ने पर परिवार और पशुओं को सुरक्षित निकालने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उनका कहना है कि चारों तरफ पानी भर जाने पर दक्षिण टोला का सड़क संपर्क पूरी तरह कट जाता है। ऐसे में रात के समय बच्चों, महिलाओं और पशुओं को लेकर बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा। इसी आशंका को लेकर लोग अभी से चिंतित हैं और एक-दूसरे से राय-मशविरा कर रहे हैं। राधेश्याम ने बताया कि फिलहाल मोबाइल के माध्यम से बाढ़ को लेकर अलर्ट और सूचनाएं मिल रही हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन से यह स्पष्ट नहीं है कि पानी बढ़ने पर उन्हें किस तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य बाढ़ में ही रास्ते पानी में डूब जाते हैं, ऐसे में भारी बाढ़ आने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। रात बढ़ने के साथ टोले में लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। ग्रामीण रतजगा कर निगरानी कर रहे हैं।
बंधों पर कैंप, गांवों से पल-पल की सूचना
संभावित बाढ़ से निपटने के लिए अफसर बंधों पर कैंप कर रहे हैं। गांवों की आशा, चौकीदार और हलका सिपाहियों को भी सक्रिय कर दिया गया है। इनसे गांवों की स्थिति और नदी के जलस्तर की पल-पल की जानकारी ली जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। एसडीआरएफ की टीम को भी आवश्यक राहत और बचाव उपकरणों के साथ अलर्ट मोड पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित गांवों से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी है।
-खेत में काम करने के लिए गए थे। अचानक सूचना मिली कि बाढ़ आने वाली है। खेत से सभी लोग वापस आ गए। प्रशासन की ओर से बताया गया है कि सुरक्षित स्थान पर रहना है। नदी का पानी रात में बढ़ सकता है। बाढ़ की चिंता सता रही है।
-रामअवध,नारायनपुर
बचपन में गांव नदी में समा गया तो प्रशासन की ओर से नारायनपुर में विस्थापित किया गया। निचला इलाका होने के कारण हर साल बाढ़ की दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। जब से सूचना मिली है, कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है। -सुखबीर, नारायनपुर
सूचना मिलने के बाद ही शाम को भोजन बना लिया गया, परिवार के साथ ऊंचे स्थान पर हूं, गांव के सभी लोग रतजगा कर रहे हैं, कभी भी नदी में पानी बढ़ सकता है। लेखपालों व पुलिस का आना-जाना लगा है। -विनोद गुप्ता, शिवपुर
बाढ़ का अलर्ट आता है, तो अफसर गांव में आते हैं। बाकी दिनों में कोई नहीं आता है। मवेशियों को सबसे अधिक परेशानी होती है। पानी भरने के बाद आने-जाने का रास्ता भी डूब जाता है। बाढ़ की चिंता सता रही है। रात की नींद छिन गई है। -हीरालाल गुप्ता, शिवपुर
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-गलेशियर झील फटने की सूचना पर नदी उस पार गांवों में गया था। अभी कोई दिक्कत नहीं है। सब कुछ कंट्रोल में है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से गांव वालों को अलर्ट किया गया है। बंधों पर पेट्रोलिंग कराई जा रही है। नदी उस पार भी कर्मचारी कैंप कर रहे हैं। अपडेट लिया जा रहा है। घबराने वाली कोई बात नहीं है। हर स्थिति से निपटने की तैयारी पूरी है। -महेंद्र सिंह तंवर, डीएम कुशीनगर
एपी बांध पर बाढ़ के खतरे को देखते हुए चौकसी में जुटा बाढ़ खंड विभाग।संवाद
एपी बांध पर बाढ़ के खतरे को देखते हुए चौकसी में जुटा बाढ़ खंड विभाग।संवाद