पडरौना। इयरफोन के इस्तेमाल से युवाओं में सुनने की क्षमता कम हो रही है। साथ ही सड़क क्रॉसिंग के समय भी इयरफोन के इस्तेमाल से दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही हैं।
डॉक्टर्स का कहना है कि 20 से 40 की आयु के 75 प्रतिशत युवाओं में सुनने की क्षमता कम होने लगी है। इसका मुख्य कारण मोबाइल का ज्यादा उपयोग करना है। युवा हेडफोन और इयरफोन का लगातार प्रयोग कर रहे हैं। इसका असर उनके कानों पर पड़ रहा है और उनके सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसीबल तक कम हो रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि इयरफोन पर लाउड म्यूजिक सुनना, लगातार फोन के संपर्क में रहना, घंटों फोन पर बात करने से कान खराब हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में प्रति दिन 10 से 15 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। लंबे समय तक इयरफोन पर म्यूजिक सुनने से कान के पर्दे की मोटाई पर प्रभाव पड़ता है।
दूर की आवाज सुनने में परेशानी के अलावा बहरापन बढ़ रहा है। ईएनटी विभाग के डॉ. प्रेम नारायण जायसवाल ने बताया कि एक घंटे से अधिक 80 डेसीबल से तेज आवाज में गाने सुनते हैं तो लगभग पांच या छह साल में सुनने की क्षमता कमजोर हो सकती है या स्थाई रूप से बहरापन भी हो सकता है।
डॉक्टर ने बताया कि सुनने की नस बहुत सेंसेटिव होती है, ज्यादा शोर आने पर नस परेशान हो जाती है। फोन के लगातार इस्तेमाल से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, नींद नहीं आना जैसी बीमारियां भी सामने आ रही हैं।
लोगों को इयरफोन या ब्लूटूथ कान में ज्यादा देर तक लगाकर गाना सुनने या बात करने से मना किया जा रहा है। फोन से होने वाली समस्याओं से प्रभावितों में ज्यादातर युवा हैं।