तमकुहीरोड। केंद्रीय बजट में इस साल वैसे तो 100 अमृत भारत, 50 नमो भारत और 200 वंदे भारत ट्रेनें चलाने की घोषणा की गई है, लेकिन कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग पर एक भी लंबी दूरी की नियमित ट्रेन चलाने की घोषणा नहीं हुई। इससे इस रूट के यात्रियों में निराशा है।
लोगों कहना है कि लंबी दूरी की साप्ताहिक ट्रेनों का संचालन तो होता है, लेकिन आमान परिवर्तन के 14 साल बाद इस रूट पर गोमतीनगर एक्सप्रेस ट्रेन को छोड़ कर किसी दूसरी ट्रेन की स्वीकृति नहीं मिली है। इससे लोगों में असंतोष है।
16 दिसंबर 2011 को कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग को छोटी से बदल कर बड़ी लाइन में परिवर्तित किया गया था। तभी से लोग इस रूट पर पूर्णकालिक लंबी दूरी की ट्रेनों की आस लगाए हैं, लेकिन गोमतीनगर एक्सप्रेस ट्रेन को छोड़ कर अभी तक कोई दूसरी लंबी दूरी की ट्रेनें नहीं चलाई गईं। केंद्रीय बजट से क्षेत्र के लोगों को थावे-कप्तानगंज मार्ग पर लंबी दूरी की नियमित ट्रेन चलाने की आस थी। लोगों का कहना है कि गोरखपुर-आनंदनगर रेलमार्ग का आमान परिवर्तन थावे-कप्तानगंज के आमान परिवर्तन के बाद हुआ था। उस रूट से कई पूर्णकालिक लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन हो रहा है।